शान्ति विधायक शान्ति जिनेश्वर, प्रातः मैं उठ कर ध्याऊं  (Shanti Vidhayak Shanti Jineshwar, Pratah Main Uth Kar Dhyau)

यह भजन शांति, आत्मशुद्धि और प्रभु भक्ति का सुंदर संदेश देता है। इसमें साध्वी फूलकुमारीजी ने बताया है कि भगवान का स्मरण मन की मलिनता दूर कर जीवन को पवित्र बनाता है। भजन आत्मा से प्रेम, परगुणों की प्रशंसा और मोह-माया से दूर रहने की प्रेरणा देता है। शांति और समर्पण के भाव से जीवन में सच्चा आनंद प्राप्त होता है।

 

शान्ति विधायक शान्ति जिनेश्वर, प्रातः मैं उठ कर ध्याऊं

🎶 लय – केम बिसारूं

✍🏻 रचयिता – साध्वी फूलकुमारीजी (लाडनूं)

 

शान्ति विधायक शान्ति जिनेश्वर, 

प्रातः मैं उठ कर ध्याऊं। 

मन री मलिनता दूर करी नै, 

पावन में बण ज्याऊं।। 

 

शान्ति नाम बड़ो सुखकारी, 

दुःख दुविधा मिट ज्यावै सारी। 

थांरै नाम तणो मैं प्रभुवर, 

कांई प्रभाव बताऊं।।

 

भूत, पिशाच, राक्षस, किन्नर,

डाकण साकण आदि भंयकर। 

टिक नै सकै थांरै नाम रै आगै, 

स्तवना तो कांई मैं गाऊं।।

 

पर-गुण लख कर मोद मनाऊँ, 

आतम रा अवगुण दूर भगाऊं। 

बस आ क्षमता पाकर जिनवर, 

जीवन ज्योति जगाऊं।।

 

तनड़ै रो नश्वर सगपण तोडूं, 

आतम स्यूं शाश्वत प्रीति मैं जोडूं। 

ममता, मोह, माया अरू मद स्यूं, 

मुगति मैं जल्दी पाऊं।।

 

मन मन्दिर में भगवन आओ, 

तन्मयता रो दीप जलाओ। 

शान्ति शान्ति री मस्ती में, 

शान्त-मनां बण जाऊं।।

 

यह भजन मन में शांति, पवित्रता और आत्मजागृति का भाव जगाता है। भगवान का स्मरण जीवन को निर्मल बनाकर मोक्ष मार्ग की प्रेरणा देता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏