यह सुंदर भक्ति गीत श्री राकेश मुनि द्वारा रचित है। इसमें भगवान महावीर के ध्यान, आत्मज्ञान और संयमपूर्ण जीवन का संदेश दिया गया है। गीत बताता है कि जीवन में सुख-दुःख, फूल और कांटे दोनों आते हैं, फिर भी मनुष्य को समता, कर्तव्य और आत्मबल के मार्ग पर चलते रहना चाहिए। प्रभु का ध्यान मन को शांति, आनंद और सकारात्मकता प्रदान करता है।
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं
🎶 लय – भगवान तुम्हारे चरणों में
✍🏻 रचयिता – श्री राकेश मुनि
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं
महावीर तुम्हारा ध्यान धरूं
अन्तर-आत्मा का ज्ञान करूं
हर सांस गीत बने मेरा,
हर चरण जीत बने मेरा।
आनन्द सुधा का पान करूं,
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं।।
मिटे निराशा का घेरा,
हो सदा प्रफुल्लित मन मेरा।
समता सरिता में स्नान करूं,
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं।।
चाहे फूल खिले पथ में,
हो तीखे शूल भले पथ में।
संयम रथ पर प्रस्थान करूं,
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं।।
भार नहीं उपहार बने,
यह जीवन सुख का द्वार बने।
क्षण-क्षण का मैं सम्मान करूं,
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं।।
फल का आग्रह नहीं करूं,
‘राकेश’ सहज कर्त्तव्य करूं।
आत्मिक बल का उत्थान करूं,
भगवान तुम्हारा ध्यान धरूं।।
यह भजन हमें भगवान महावीर के आदर्शों पर चलने, संयम और समता अपनाने तथा हर क्षण का सम्मान करने की प्रेरणा देता है। सच्चे ध्यान और आत्मबल से जीवन सुखमय और सफल बन सकता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
