यह भजन भगवान महावीर के जन्म और उनके बाल रूप की मधुर लीलाओं का सुंदर वर्णन करता है। इसमें माता त्रिशला के लाल के आगमन से पूरे संसार में फैली खुशी को बताया गया है। चैत सुदी तेरस के पावन दिन उनका जन्म होता है और हर घर में आनंद छा जाता है। उनके बचपन की चंचलता, मुस्कान और मासूम हरकतें सबका मन मोह लेती हैं।
त्रिशला रो जायोड़ो इण दुनिया में जादू करग्यो
🎶 लय – नखरालो देवरिया भाभी पर जादू करग्यो
त्रिशला रो जायोड़ो,
इण दुनिया में जादू करग्यो,
जादू करग्यो, ओ तो जादू करग्यो।।
चैत सुदी तेरस दिन,
राजा सिद्धार्थ घर जायो।
कुण्डलपुर में जन्म लियो है,
घर घर में आनन्द छायो।।
राज घराने रो सुरजियो,
इण दुनिया में जादू करग्यो।।
होले होले झूले पालणे,
मन मांही मुस्कावे।
माता गावे लोरी भी,
निंदड़ली नहीं आवे।।
हिवड़े रो हालरीयो,
इण दुनियां में जादू करग्यो।।
ठुमक ठुमक कर चले आंगणे,
घुंघरिया झनकावे।
पल में रूठे पल में माने,
सब का मन हर्षावे।।
अहिंसा रो पालणियो,
इण दुनियां में जादू करग्यो।।
नर-नारी और देवी देवता,
इण पर वारी जावै।
“ते.यु.प.मंडल” रा साथीड़ा,
सबने गीत सुनावै।।
दुखियाँ ने तारणियो,
इण दुनियां में जादू करग्यो।।
यह भजन हमें भगवान महावीर के जीवन से प्रेरणा लेने और अहिंसा के मार्ग पर चलने की सीख देता है। उनके जन्म की खुशी और बाल लीलाएँ हमारे मन को शांति और आनंद से भर देती हैं।
🙏जय जिनेंद्र🙏
