यह जैन धर्म का एक पवित्र और प्रभावशाली मंत्र है। इसमें भगवान शांति नाथ, कुंथु नाथ, अरिष्टनेमि और पार्श्वनाथ का स्मरण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन तीर्थंकरों का श्रद्धा से स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और रोगों का नाश होता है।
रोगनिवारक मंत्र
संती कुंथु अरहो, अरिट्ठनेमी जिणंदपासो य।
समरंताणं णिच्चं, सव्वं रोगं पणासेई।।
Santi Kunthu Arho, Arittanemi Jinandapaso Ya
Samarantaanam Niccham, Savvam Rogam Panasei
रोगनिवारक मंत्र का अर्थ (Meaning in Hindi & English)
संती कुंथु अरहो,
भगवान शांति नाथ और कुंथु नाथ अरिहंत हैं।
Lord Shantinath and Kunthunath are Arihants (worthy of worship).
अरिट्ठनेमी जिणंदपासो य।
भगवान अरिष्टनेमि और जिनेन्द्र पार्श्वनाथ भी।
Lord Arishtanemi and Lord Parshvanath, the Jina, as well.
समरंताणं णिच्चं,
जो उनका नित्य स्मरण करते हैं।
Those who remember them constantly.
सव्वं रोगं पणासेई।।
उनके सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।
All their diseases are destroyed.
🙏जय जिनेंद्र🙏
