यह सुंदर भजन नवकार महामंत्र की महिमा को सरल शब्दों में समझाता है। इसमें बताया गया है कि हमें प्रतिदिन नवकार मंत्र का सुमिरण करना चाहिए, क्योंकि यही जैन आगम का सार है। यह मंत्र हमें सही मार्ग दिखाता है और मन को शुद्ध करता है। भजन में कई उदाहरण देकर समझाया गया है कि नवकार मंत्र की शक्ति से दुख दूर होते हैं और जीवन में शांति मिलती है।
महामंत्र नवकार सुमिरण नित्य करो जी नित्य करो
🎶 लय – चाँद चढ्यो गिगनार
महामंत्र नवकार,
सुमिरण नित्य करो जी नित्य करो।
जैनागम का सार,
प्रातः ध्यान धरो जी ध्यान धरो।।
श्रावक का आचार,
पहला बतलाया जी बतलाया।
शुभ मन जपते जाप,
मुक्ति पद पाया जी पद पाया।।
है स्वार्थ भरा संसार,
कोई नहीं अपना जी नहीं अपना।
सुख-दुःख में है आधार,
नव पद है शरणा जी है शरणा।।
ले शरण सुदर्शन सेठ,
जाता दर्शन को जी दर्शन को।
शूल बनी झट फूल,
विस्मय जन-जन को जी जन-जन को।।
बढ़ा द्रोपदी चीर,
नवपद जपने से जी जपने से।
बच गया अमर कुमार,
देखो मरने से जी मरने से।।
नाग बना गलहार,
श्रीमती हरसायी जी हरसायी।
अनल हुई झट शान्त,
सीता जय पाई जी जय पाई।।
रोग शोक व्यवधान,
सारे कट जाते जी कट जाते।
कष्टों के तूफान,
पल में हट जाते जी हट जाते।।
राजुल के उद्गार,
माला नित जपना जी नित जपना।
क्या मिट्टी से प्यार,
आखिर जग सुपना जी जग सुपना।।
इस भजन से हमें सीख मिलती है कि नवकार मंत्र का नित्य जप जीवन को सुखमय बनाता है। यह हमें हर कठिनाई में सहारा देता है और अंत में मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाता है।🙏जय जिनेंद्र🙏
