तुमसे लागी लगन (Tumse Laagi Lagan)

यह भजन पारसनाथ प्रभु के प्रति अनन्य श्रद्धा, शरणागति और आत्मसमर्पण का भाव व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने जीवन के सभी संकटों के निवारण की प्रार्थना करते हुए प्रभु के चरणों में पूर्ण विश्वास प्रकट करता है। संसारिक आसक्ति, स्वर्ग-सुख और भय से ऊपर उठकर संयम, भक्ति और मोक्ष-मार्ग की कामना इस भजन का मूल संदेश है। यह रचना मन को शांत करती है और प्रभु-स्मरण में स्थिर होने की प्रेरणा देती है। 

 

तुमसे लागी लगन

🎶 लय – ऐसी लागी लगन 

✍🏻 रचयिता – श्री पंकज जैन

 

तुमसे लागी लगन, 

लेलो अपनी शरण, 

पारस प्यारा,

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

निश दिन तुमको जपूं, 

पर से स्‍नेहा तजूं,

जीवन सारा, 

तेरे चरणों में बीते हमारा,

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

अश्‍वसेनजी के राजदुलारे, 

वामादेवी के सुत प्राण प्यारे,

सबसे नेह तोड़ा, 

जग से मुंह को मोड़ा, 

संयम धारा।

 

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

इन्द्र और धरणेन्द्र भी आये, 

देवी पद्मावती मंगल गाये,

आशा पूरो सदा, 

दु:ख नहीं आवे कदा, 

सेवक थांरा।

 

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

जग के दु:ख की परवाह नहीं है, 

स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है,

मेटो जनम मरण, 

होवे ऐसा यतन, 

पारस प्यारा।

 

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊं, 

जग के नाथ तुम्हे कैसे पाऊं,

‘पंकज’ व्याकुल भया, 

दर्शन बिन ये जिया, 

ना लागै प्यारा।

 

मेटो मेटो जी संकट हमारा।।

 

यह भजन भक्ति, वैराग्य और शरणागति की गहन भावना को प्रकट करता है। प्रभु के चरणों में समर्पित होकर भक्त जीवन के सभी संकटों से मुक्त होने और जन्म-मरण से पार होने की प्रार्थना करता है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏