यह भावपूर्ण भक्ति गीत मुनि मुनिसुव्रतजी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य तुलसी के प्रति गहरी श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया है। गीत में उन्हें प्रकाश, करुणा, मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बताया गया है। रचनाकार ने आचार्य तुलसी को भगवान महावीर के आदर्शों का सच्चा प्रतिनिधि मानते हुए उनके चरणों में अपना जीवन अर्पित करने की भावना व्यक्त की है।
तुलसी तुम्हारा नाम हम दिल में सदा बसाएं
🎶 लय – वो दिल कहां से
✍🏻 रचयिता – मुनि मुनिसुव्रतजी
तुलसी तुम्हारा नाम हम,
दिल में सदा बसाएं।
हर पल हर घड़ी में,
तेरे ही गीत गाएं।।
सूरज सा तेज तुझमें,
तम को सदा मिटाए,
भूले हुए पथिक को,
मंजिल सदा बताए।
संबल तुम्हारा लेकर,
आगे चरण बढाएं।।
आंखो में तेरे बहती,
करुणा की दिव्य धारा,
हम सब को तुलसी जग में,
तेरा ही है सहारा।
तेरी ही छत्र छाया में,
जीवन सफल बनाएं।।
कलयुग में तुलसी सचमुच,
महावीर का नमूना,
तेरे को देख भगवन,
फूले हमारा सीना।
तेरी चरण यह धूली,
सिर पर सदा चढाएं।।
पथद्रष्टा तूं हमारा,
तूं ही है जगसितारा,
अर्पण तेरे चरण में,
जीवन प्रभो! हमारा।
पाकर तुझे हां ‘सुव्रत’,
निज भाग्य को सराएं।।
यह गीत आचार्य तुलसी के दिव्य व्यक्तित्व, करुणा और मार्गदर्शक रूप को नमन करता है। उनके आदर्श जीवन को प्रेरणा बनाकर चलने से मानव जीवन सफल, सार्थक और उज्ज्वल बन सकता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
