स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे गावां यशोमय गान (Swamiji Tharo Sangh Niralo Re Gava Yashomay Gaan)

यह भजन आचार्य भिक्षु द्वारा स्थापित तेरापंथ संघ की महानता और विशिष्टता को दर्शाता है। इसमें संघ के इतिहास, त्याग, अनुशासन और आदर्शों का सरल शब्दों में वर्णन किया गया है। गीत में गुरु परंपरा, संगठन की शक्ति और धर्म के सच्चे मार्ग की महिमा बताई गई है। यह भजन हमें प्रेरणा देता है कि हम भी जीवन में संयम, सेवा और सदाचार को अपनाकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाएं। 

 

स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे गावां यशोमय गान

🎶 लय – सावण आयो रे 

✍🏻 रचयिता – साध्वी चाँदकुमारी जी

 

संघ निरालो रे, गावां यशोमय गान, 

स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे,

बोल रह्यो बलिदान, 

स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे।

 

मां दीपां सिंह सपनो देख्यो, 

सचमुच बो साकार हुयो, 

कंटालियै बल्लू शाह घर में, 

बालक रो अवतार हुयो। 

भीखण अभिधान दियो है, 

शुभ मुहुरत पहचान।।

 

धन्य हुई अंधेरी ओरी, 

थांरो चरण स्पर्श पाकर, 

जागी किस्मत यक्ष देव री, 

नमग्यो चरणां में आकर। 

करतो तन मन स्यूं सेवा, 

छवि बणी अम्लान।।

 

शास्त्र सिन्धु री गहराई में, 

उतस्या गहरा डटकर, 

एक अमिट आलेख लिख्यो, 

हर शब्द समीक्षा रै बल पर। 

दिल रो संकल्प फल्यो हो, 

सत्पथ पर प्रस्थान।।

 

संयम स्यूं अनुप्राणित संगठन, 

गण रो परित्राण है, 

मर्यादा अनुशासन संघ, 

व्यवस्था जीवन प्राण है। 

लिख्यो जो निज हाथां स्यूं, 

अमर बण्यो सुविधान।।

 

महामनस्वी महाप्रज्ञ जी, 

करै संघ री रखवाली, 

महाश्रमण सा युवाचार्य पा, 

बण्यो संघ गौरवशाली। 

अणुव्रत प्रेक्षा उपक्रम स्यूं, 

पायो ऊंचो स्थान।।

 

यह भजन तेरापंथ संघ की महान परंपरा और आदर्शों को उजागर करता है। गुरुजनों के मार्गदर्शन से जीवन में अनुशासन और शांति आती है। यह हमें सच्चे धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏