यह भजन आत्ममार्ग की सच्ची खोज को प्रकट करता है। इसमें साधक स्वामी से सही पंथ दिखाने की प्रार्थना करता है। रचना में समर्पण, सहनशीलता, विनय और संतुलन जैसे गुणों का महत्व बताया गया है। संतों की वाणी को कमल के खिलने से तुलना की गई है, जो आंतरिक जागृति का प्रतीक है। यह भजन हमें अपने अहं को छोड़कर सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
स्वामी पंथ दिखाओ जी
🎶 लय – रूठ्योड़ा शिवशंकर
✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाप्रज्ञ
स्वामी पंथ दिखाओ जी
तेरापंथ दिखाया,
मेरा पंथ दिखाओ जी।
मेरा पंथ बनेगा तब ही,
तेरापंथ मिलेगा।
सूखे सरवर के परिसर में,
कैसे कमल खिलेगा?
भारिमाल मुनिवर से पूछो,
और हेम से पूछो।
प्रवर खेतसीजी से पूछो,
मुनि वेणी से पूछो।।
करो करो तुम पूर्ण समर्पण,
मेरा पंथ मिलेगा।
भारिमाल की इस वाणी से,
शतदल कमल खिलेगा।।
सहन करो तुम सहन करो तुम,
मेरा पंथ मिलेगा।
संत हेम की इस वाणी से,
शतदल कमल खिलेगा।।
विनय करो तुम विनय करो तुम,
मेरा पंथ मिलेगा।
संत खेतसी की इस वाणी से,
शतदल कमल खिलेगा।।
हर स्थिति में तुम रहो संतुलित,
मेरा पंथ मिलेगा।
मुनि वेणो की इस वाणी से,
शतदल कमल खिलेगा।।
‘महाप्रज्ञ’ इस पथदर्शन से,
मेरा पंथ मिलेगा।
मेरा पथ, तेरा बनने पर,
शतदल कमल खिलेगा।।
यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा पंथ भीतर से शुरू होता है। जब हम समर्पण, विनय और संतुलन अपनाते हैं, तब जीवन में शतदल कमल खिलता है और आत्मा को शांति मिलती है। सही मार्ग का प्रकाश फैलता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
