स्वामी भीखणजी रो नाम आठूं याम ध्यावां (Swami Bhikhanji Ro Naam Aathu Yaam Dhyavan)

यह भजन आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य श्री भिक्षु (स्वामी भीखणजी) के महान जीवन, तप, त्याग और उनके उपकारों का भावपूर्ण स्मरण किया गया है। भजन में बताया गया है कि स्वामी भीखणजी का नाम सदा स्मरण करने से जीवन में सही मार्ग की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने धर्म में मर्यादा स्थापित की और तेरापंथ की मजबूत नींव रखी।

 

स्वामी भीखणजी रो नाम आठूं याम ध्यावां

🎶 लय – म्हांरे आंगणिये में 

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री तुलसी 

 

स्वामी भीखणजी रो नाम आठूं याम ध्यावां,

बाबलियै रो उपकार कियां भूल ज्यावां।

सांवरियो म्हारे रूं-रूं रम्यो है,

पल-पल छिन-छिन स्मृति सरसावां।।

 

मंत्राक्षर है नाम स्वाम रो,

सरल पंथ है परमधाम रो,

भिक्खू नाम री गंगोतरी में नित न्हावां।।

 

बलिदानां री अमर कहाणी,

तीव्र तपोबल री सहनाणी,

कामकुंभ, कल्पवृक्ष, चिंतारत्न  पावां।।

 

दो सौ बरसां री बै बातां,

बैठ जगाई बाबो रातां,

कर याद मर्याद मन हुलसावां।।

 

खड़ा-खड़ा पड़िकमणो करता,

बुढ़ापै रो ध्यान न धरता,

उतपातिया प्रतिभा री भारी घटनावां।।

 

गच्छां बाड़ां री दुरवस्था,

मेटी सारी विषम व्यवस्था,

तेरापंथ री सजीव नींव थिर ठावां।।

 

समझायो जीवन रो दर्शन,

नहिं भायो, उपरि आकर्षण,

बाही श्रृंखला सजोश आपां अपणावां।।

 

धर्म क्रांति रो बिगुल बजायो,

रूढ़िवाद रो भूत भगायो,

देखो आज ओ अनूठो दृश्य देख पावां।।

 

है ज्योतिर्मय जीवन जीणो,

जी भर शान्त सुधारस पीणो,

झीणो स्वामीजी रो तत्व-बोध सीख पावां।।

 

सुद भाद्रव सरदारशहर में,

धर्म-बहार लगी घर-घर में,

‘तुलसी’ प्रेक्षा-ध्यान साधना रो रंग ल्यावां।।

 

यह भजन हमें स्वामी भीखणजी के आदर्श जीवन, त्याग और धर्म-सेवा को याद करने की प्रेरणा देता है। उनके बताए मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन को भी धर्म, मर्यादा और साधना से श्रेष्ठ बना सकते हैं। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏