यह भजन स्वामी भिक्षुजी के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने गुरु के दर्शन की तीव्र इच्छा और प्रतीक्षा को सरल शब्दों में प्रकट करता है। भजन में स्वामीजी को जीवन का प्रकाश, मार्गदर्शक और दुःख दूर करने वाला बताया गया है। रचयिता साध्वी फूलकुमारी जी ने बहुत भावपूर्ण तरीके से भक्ति, समर्पण और आस्था को दर्शाया है।
स्वामी भीखणजी कद स्यूं, म्हें बाट निहारां
🎶 लय – करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं
✍🏻 रचयिता – साध्वी फूलकुमारी जी (लाडनूं)
स्वामी भीखणजी कद स्यूं,
म्हें बाट निहारां,
दिखलाद्यो प्यारी सूरत,
दीपां दुलारा, दीपां दुलारा,
थांरी करां आरती, थांरी करां आरती।।
स्वर्गां रे वैभव में थे तो,
जाकर देव रम्या,
पर म्है तो थांरै शासन में,
आ देखो किता जम्या।
ॐ भिक्षु माळा फेरां,
नित सांज सवारा,
दिखलाद्यो प्यारी सूरत,
दीपां दुलारा, दीपां दुलारा।।
खुदग्या म्हांरै काळजै में,
ज्यूं हनुमत रै राम,
बणग्या प्राणां रा देवता,
ज्यूं मीरां रै घनश्याम।
काळी-काळी रातां में,
अभिनव उजारा,
दिखलाद्यो प्यारी सूरत,
दीपां दुलारा, दीपां दुलारा।।
विघ्नहरण मंगल करण,
है स्वाम भिक्षु रो नाम,
गुण ओळख सुमिरण करै,
सरै उणरा मनवंछित काम।
पितवाणी पूरी करली,
थे हार हिया रा,
दिखलाद्यो प्यारी सूरत,
दीपां दुलारा, दीपां दुलारा।।
यह भजन हमें गुरु भक्ति, धैर्य और सच्ची आस्था का महत्व सिखाता है। स्वामी भिक्षुजी के स्मरण से जीवन में शांति और सही मार्ग मिलता है। हमें भी ऐसे ही श्रद्धा भाव से भक्ति करनी चाहिए।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
