यह सोलह सती स्तवन मुनि उदय रतन जी द्वारा रचित एक भक्तिमय स्तुति है। इसमें जैन धर्म की सोलह महान सती महिलाओं के पवित्र जीवन, शील, त्याग, संयम और आदर्श चरित्र का स्मरण किया गया है। प्रभात काल में इनके नामों का जाप करने से शुभ भाव जागृत होते हैं और धर्म, सदाचार तथा आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त होती है।
सोलह सती स्तवन - आदिनाथ आदि जिनवर बंदी
🎶 लय – प्रभाती
✍🏻 रचयिता – मुनि उदय रतन जी
आदिनाथ आदि जिनवर बंदी,
सफल मनोरथ कीजिये ए।
प्रभाते उठी मांगलिक कामे,
सोलह सती नो नाम लीजिए ए।।
बाल कुमारी जग हितकारी,
ब्राह्मी भरत नीं बेनडी ए।
घट-घट व्यापक अक्षर रूपे,
सोलह सती मांही जे बड़ी ए।।
बाहुबल भगिनी सती सिरोमणी,
सुन्दरी नामे ऋषभ सुता ए।
अंक स्वरूपी त्रिभुवन मांहे,
जेह अनुपम गुण युता ए।।
चन्दनबाला बालपणे थी,
शीलवती शुद्ध श्राविका ए।
उड़द ना बाकुला वीर प्रतिलाभ्या,
केवल लही व्रत भाविका ए।।
उग्रसेन धुवा धारिणी नन्दिनी,
राजीमती नेमी-बल्लभा ए।
यौवन वय में काम नैं जीत्यो,
संयम लेई देव दुल्लभा ए।।
पंच भरतारी पाण्डव नारी,
द्रुपद तनया बखाणिए ए।
एक सौ आठे चीर पुराणा,
शील महिमा तसु जाणिये ए।।
दशरथ नृप नीं नारी निरूपम,
कौशल्या कुल चन्द्रिका ए।
शील सलूणी राम जणेता,
पुण्य तणी परणालिका ए।।
कौशम्बिक ठामे सतानिक नामे,
राज करे रंग राजियो ए।
तसु घर धरणी मृगावति सति,
सुर भवने यश गाजियो ए।।
सुलसा साची शील न काची,
राची नहीं विषया रसे ए।
मुखड़ो जोतां पाप पलाए,
नाम लेतां मन उल्लसे ए।।
राम रघुवंशी तेहनिं कामिनी,
जनक सुता सीता सती ए।
जग सहु जाणे धीज करंता,
अनल शीतल थयो शील थी ए।।
काचे तांतण चालणी बांधी,
कुआ थकी जल काढ़ियो ए।
कलंक उतारवा सती सुभद्रा,
चम्पा द्वार उघाड़ियो ए।।
सुर नर वन्दित शील अखण्डित,
शिवा शिव पद गामिनी ए।
जेहना नामे निर्मल थइए,
बलिहारी तसु नामिनी ए।।
हस्तिनागपुर पाण्डुराय नीं,
कुन्ता नामे कामिनी ए।
पाण्डव माता दशे दशारनी,
बहन पतिव्रता पद्मिनी ए।।
शीलवती नामे शीलव्रत धारिणी,
त्रिविधे तेहने वन्दिए ए।
नाम जपंता पातक जाये,
दर्शन दुरित निकन्दिए ए।।
निषिधा नगरी नल नरिन्द नीं,
दमयन्ति तसु गेहनी ए।
संकट पड़तां शील ज राख्यो,
त्रिभुवन कीरति तेहनी ए।।
अनंग अजिता जग जन पूजिता,
पुष्पचूला ने प्रभावती ए।
विश्व विख्याता कामति दाता,
सोलहवीं सती पद्मावती ए।।
वीरे भाखी शास्त्रे साखी,
‘उदयरतन’ भाखै मुदा ए।
व्हाणं वहतां जे नर भणशे,
ते लहशे सुख संपदा ए।।
यह स्तवन सती नारियों के शील, त्याग और धर्मनिष्ठा का सुंदर स्मरण कराता है। श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने से मन में सद्गुण बढ़ते हैं, शुभ भाव जागते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
