यह भजन सिरियारी धाम और पूज्य बाबाजी की महिमा का मधुर गुणगान है। इसमें भक्त अपने आराध्य से जीवन रूपी बेड़े को पार लगाने की विनती करता है। सरल राजस्थानी भाषा में रचा गया यह गीत श्रद्धा, समर्पण और अटूट विश्वास को व्यक्त करता है। हर अंतरे में चरणों की वंदना और ध्यान की भावना झलकती है, जो भक्त के हृदय की सच्ची पुकार को प्रकट करती है।
सिरियारी वाले करोनी करोनी बेड़ो पार
🎶 लय – सालासर वाले करोनी करोनी
सिरियारी वाले करोनी करोनी बेड़ो पार,
करोनी करोनी बेड़ो पार,
सिरियारी वाले करोनी करोनी बेड़ो पार।
म्हें थारे चरणा में आया,
भक्ति भेटणों सागे लाया।
आप करोनी स्वीकार।।
थांरो पल पल ध्यान लगावां,
म्हें थांरी बलिहारी ज्यावां।
म्हाने तो थारो ही आधार।।
थांरी पावन पुण्य समाधी,
बड़े खोज स्यूं म्हाने लाधी।
सपनो हुयो साकार।
बाबै नै कोई दिल स्यूं ध्यावै,
वो नर मन वांछित फल पावै।
जुड़ ज्यावै बाबे स्यूं तार।।
तीरथ धाम बण्यो सिरियारी,
तपस्विनी सरिता सुखकारी।
धम्मगिरी री खड़ी कतार।।
सुव्रत है चरणा रो चाकर,
दर्शण दे दो एकर आकर।
वन्दन थांने बारम्बार।।
यह भजन हमें सच्ची श्रद्धा और समर्पण का संदेश देता है। जब भक्त विश्वास के साथ प्रभु का स्मरण करता है, तब उसका जीवन सफल और सार्थक बन जाता है। हमें इसी भाव से भक्ति करनी चाहिए। सदैव और निष्ठापूर्वक।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
