यह भजन भगवान महावीर स्वामी के त्याग, तप, करुणा और समता के महान आदर्शों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है। इसमें उनके संयममय जीवन, अहिंसा के संदेश और आत्मशुद्धि के मार्ग को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह रचना हमें भौतिक आसक्तियों से ऊपर उठकर करुणा, सद्भाव और आत्मकल्याण की ओर प्रेरित करती है। भजन का भाव मन को शांति देता है और जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करता है।
श्रद्धा से नमन करें हम
🎶 लय – ओ प्यारे त्रिशला नंदन
✍🏻 रचयिता – श्री राकेश मुनि
श्रद्धा से नमन करें हम,
तेरा अनुसरण करें हम।
पल-पल में स्मरण करें हम,
महावीर स्वामी।।
भौतिक सुख छोड़ सारे,
संयम का पथ अपनाया,
ममता के तोड़ धागे,
आत्मा में ध्यान लगाया।
जग को परिवार बनाया,
तूं मैं का भेद मिटाया,
करुणा का रस बरसाया,
महावीर स्वामी।।
भीषण उपसर्ग तुमने,
समता से सहन किए थे,
तप की पावक में बंधन,
कर्मो के दहन किये थे।
गुण की गंगा में न्हाएं,
कल्मष सब दूर हटाएं,
जीवन हम सफल बनाएं,
महावीर स्वामी।।
समता सद् भावना का,
तुमने संदेश दिया था,
हिंसा के बीज मिटाओ,
तुमने उपदेश दिया था।
सोया संसार जगाया,
मन का भ्रमजाल मिटाया,
भूलों को पथ दिखलाया,
महावीर स्वामी।।
दीनों दलितों में तुमने,
आत्मिक विश्वास जगाया,
दु:खित पीड़ित मानस में,
अभिनव उल्लास जगाया।
शिक्षाएं मंगलकारी,
गुणफूलों की फुलवारी,
हम हैं सारे आभारी,
महावीर स्वामी।।
यह भजन हमें भगवान महावीर स्वामी के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा, संयम और करुणा को जीवन में अपनाकर हम आत्मशुद्धि कर सकते हैं और अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
