यह भक्ति गीत “सांवरिया थोरै संघ स्यूं लागी म्हांनै प्रीत” साध्वी राजीमती जी द्वारा रचित एक भावपूर्ण जैन भजन है। इस गीत में धर्म, साधु-संघ और आचार्यों के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया गया है। भजन में बताया गया है कि महापुरुषों के चरणों से धर्म की भूमि पवित्र बनती है और समाज में धर्म की जागृति फैलती है।
सांवरिया थोरै संघ स्यूं लागी म्हांनै प्रीत
🎶 लय – बाजरिया थांरो खीचड़ो
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी
सांवरिया थोरै संघ स्यूं,
लागी म्हांनै प्रीत।
लागी म्हांनै प्रीत सांवरा,
गावां भक्ति गीत।।
धर्म क्रांति रा बीज बो दिया,
बाबो खेतम खेत।
महाप्रभु रै पगल्यां स्यूं,
आ बणगी सोनो रेत।।
शिथिलाचारी साध सत्यां री लागी,
जेटम जेट।
कुण बैठ्यो कितणै पानी में,
खोल दिखायो पेट।।
आचारी सन्तां स्यूं राख्यो,
बाबो हेतम हेत।
भरै बजारां हेम मुनि री,
चादर दीन्ही बेंत।।
ज्वार उठै जद समदरियै में,
उछलै सीपां संग।
मोती तो तल में रह ज्यावै,
कच्छ मच्छ रो भंग।।
तुलसी री पुण्याई पहुंची,
सात समुद्रां पार।
कीरत फैली मुलकां-मुलकां,
पग-पग जय-जयकार।।
ईं गण नै नहीं लागण देस्यां,
ठण्डी ताती पून।
आंख्यां लाल उठावै गण पर,
कुणसी देखी सूंन।।
बावै री बाड़ी में लाग्यो,
देखो ठाठम ठाठ।
स्वामीजी रे जीवन स्यूं सब,
सीखो समता पाठ।।
यह भजन धर्म, साधु-संघ और आचार्यों के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देता है। इसके माध्यम से हमें धर्म मार्ग पर चलने, समता अपनाने और महापुरुषों के उपदेशों से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा मिलती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
