यह सुंदर भजन “रूं रूं में सांवरियो रमग्यो, जबरो दीप जलायो हो” साध्वी राजीमती जी द्वारा रचित है। यह भजन प्रभु और गुरुदेव के प्रति गहरी श्रद्धा, भक्ति और प्रेरणा का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि जब मन में सच्ची भक्ति जागती है, तो जीवन में नई रोशनी और नई चेतना आती है। प्रभु का नाम लेने से मन में उत्साह बढ़ता है और दुख दूर हो जाते हैं।
रूं रूं में सांवरियो रमग्यो, जबरो दीप जलायो हो
🎶 लय – बादलियो आंखड़ल्या में
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी
रूं रूं में सांवरियो रमग्यो,
सांवरियो रमग्यो,
जबरो दीप जलायो हो,
सांवरियो।
नई रोशनी ल्यायो हो,
सांवरियो।।
स्वामीजी रो नाम लियां,
जोश घणो जागै है,
भिक्षु-भिक्षु बोलतां ही,
कष्ट सारा भागै है।
जन-जन रै मन भायो हो,
सांवरियो।।
कांटां में सुवास फैली,
सांवरिये रै नाम री,
भाटां में कहाणी बोलै,
सांवरियै रै काम री।
नई चेतना ल्यायो हो,
सांवरियो।।
अंधेरी ओरी में बोलो,
नींद किंनै आवै है,
बाबै रो कठैजो देखो,
देवां नै डरावै है।
चीर बादली आयो हो,
सांवरियो।।
छाती में मुक्कां री खाई,
हार कोनी मानी हो,
गाल्यां री बोछाड़ आई,
बात कोनी ताणी हो।
सिंह केशरी गूंज्यो हो,
सांवरियो।।
संघ है महान शान,
संघ री सवाई है,
संघ री जो सेवा करै,
उण नै बधाई है।
गण नै खूब सजायो हो,
सांवरियो।।
यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु और गुरुदेव के नाम में बहुत शक्ति है। उनके स्मरण से मन में साहस, शांति और भक्ति बढ़ती है। यही भाव जीवन को उजाला और सही दिशा देता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
