प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन (Pratah Uth Parmeshthi Vandan)

यह सुंदर भजन “प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन” प्रातःकाल में गाए जाने वाला एक पावन स्तवन है। इसमें परमेष्ठी भगवान, चौबीस तीर्थंकर, गणधर, आर्यिकाएँ, साधु-साध्वी तथा महान गुरुओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है। यह भजन हमें दिन की शुरुआत निष्काम भाव, शांति और भक्ति के साथ करने की प्रेरणा देता है। इसके माध्यम से आत्मशुद्धि, सद्गुणों की वृद्धि और धर्म में दृढ़ता का संदेश मिलता है।

 

प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन

🎶 लय – कितना बदल गया इंसान 

✍🏻 रचयिता – साध्वी सोमलता जी

 

प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन, 

करूं सदा निष्काम।

शान्ति रहेगी आठों याम।।

 

ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन, 

सुमति, पद्मप्रभु पाप निकन्दन।

नाथ सुपार्श्‍व, चन्द्रप्रभु, सुविधि, 

शीतल प्रभु से चाहूं सिद्धि।

समरू नित श्रेयांसदेव अरु, 

वासुपूज्य अभिराम।।

 

विमल, अनंत, धर्म सुखकारी, शांति,

कुंथु, अर अरिष्टहारी।

मल्लिनाथ, मुनिसुव्रत स्वामी, नमीनाथ,

नेमी जगनामी।

वामानंदन पारस जिनवर, 

महावीर महानाम।।

 

अर्हत सीमंधर, युगमंधर, बाहु, 

सुबाहु सुजाती जिनवर।

स्वयंप्रभु, ऋषभानन ध्याऊं, 

अनंतवीर्य को शीश नमाऊं।

सूर, विशाल जिनेश्‍वर है, 

भक्तों के तिलम ललाम।।

 

चंद्रबाहु, चंद्रानन विभुवर, वज्रधरेश,

भुजंग अधीश्‍वर।

ईश्‍वर, नेमीप्रभु, शुभंकर, वीरसेन,

महाभद्र, ज्योतिर्धर।

देवयशेश्‍वर, अजित विहरमानों,

को कोटि प्रणाम।।

 

गौतम, व्यक्त, सुधर्मा गणधर,

मंडित, मौर्यपुत्र महिमाधर।

अचलभ्रात, मेतार्य, मुनीश्‍वर, 

अग्‍निभूति, प्रभास प्रभाकर।

वायुभूति, अकम्पित सुमिरण,

हरता कष्ट तमाम।।

 

ब्राह्मी, सुन्दरी, चन्दनबाला,

कौशल्या, सीता गुणमाला।

कुन्ती, सुलसा, मृगावतीजी,

शिवा, द्रोपदी, राजीमतीजी।

पद्म, चूला, प्रभा, सुभद्रा,

दमयंती सुखधाम।।

 

भिक्षु, भारमल भाग्य विधाता, रायचंद,

जय जश जगत्राता।

मघवा, माणिक, डालिम गुरुवर, 

कालू, तुलसी, महाप्रज्ञवर।

पूज्यप्रवर श्री महाश्रमण, 

से पाएं नव आयाम।।

 

थे गलुंड के अमीचंदजी, रोयट के,

मुनि भीमचंदजी।

सयरवाल के राम तपस्वी, लावा के,

शिवचंद यशस्वी।

नमन करूं बडनगर धरा के,

तपसी कोदर स्वाम।।

 

श्री सरदार, गुलाब शान है, 

नवलां, जेठां सती कान है।

महासती झमकूं, लाडांजी, 

महाश्रमणी श्री कनकप्रभाजी।

‘सोमलता’ गुरु गुण उपवन में,

रमण करूं अविराम।।

 

यह भजन हमें हर दिन श्रद्धा, नम्रता और भक्ति के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। परमेष्ठी और गुरुओं का स्मरण करने से मन शांत होता है और आत्मा में धर्म के प्रति दृढ़ विश्वास जागृत होता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏