यह भजन साध्वीप्रमुखा महाश्रमणीजी द्वारा रचित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। इसमें आचार्य श्री तुलसी के महान आदर्शों, सद्गुणों और मानवता के लिए किए गए अमूल्य योगदान का स्मरण किया गया है। भजन में उनके प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई है। साथ ही उनके दिव्य व्यक्तित्व और शाश्वत संदेश का सुंदर गुणगान किया गया है।
प्रभो! तुम्हारे आदर्शों पर चलता जाए जग सारा
🎶 लय – प्रभो! तुम्हारे पावन पथ
✍🏻 रचयिता – साध्वीप्रमुखा महाश्रमणीजी
प्रभो! तुम्हारे आदर्शों पर,
चलता जाए जग सारा।
कीर्तिमान जो गढ़े आज तक,
उनको अर्पित नमन हमारा।।
दर दीवार नहीं मंदिर में,
जब चाहो तुम आ जाओ,
मझधारा में जीवन-नौका,
पार उसे अब पहुंचाओ।
महावीर ने सती चन्दना,
को ज्यों आकर दिया सहारा।।
परम पुरुष के अवदानों की,
है गाथा लम्बी-चौड़ी,
अष्ट संपदाएं आगम में,
नहीं एक तुमने छोड़ी।
सद्गुण-पारावार छलाछल,
ओर-छोर उसका न निहारा।।
कहां आज अद्भुत मुद्राएं?
वह मोहक मुस्कान कहां,
सिंहनाद वह कहां खो गया,
ऊर्ध्वबाहु आह्वान कहां।
खोज रही है आंखें सबकी,
कहां खो गया दिव्य नजारा।।
हुए अगोचर इन आंखों से,
पर कण-कण में व्याप्त तुम्हीं,
शाश्वत सत्य घुला वाणी में,
हो इस युग में आप्त तुम्हीं।
प्राणों के छालों पर मरहम,
कर दो यदि तुम एक इशारा।।
चमक रहा सौभाग्य-सूर्य गण,
नन्दन-वन का इस जग में,
मोड़-मोड़ पर किरणें उतरी,
बिछा उजाला हर मग में।
गूंज रहा है नभ धरती में,
‘जय तुलसी’, ‘जय तुलसी’ नारा।।
यह भजन आचार्य श्री तुलसी के आदर्शों, प्रेरणा और महान कार्यों को नमन करता है। उनके विचार आज भी मानवता को सही दिशा देते हैं तथा जीवन में सेवा और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश प्रदान करते हैं।
🙏जय जिनेंद्र🙏
