पाछा भेजोनी भीखणजी म्हारे गुरुवर ने (Pachha Bhejoni Bhikhanji Mhare Guruvar Ne)

यह भजन गुरु के प्रति गहरे प्रेम और विरह की भावना को व्यक्त करता है। इसमें शिष्य अपने गुरुवर से बिछड़ने का दुःख प्रकट करता है। लोग कुछ भी कहें, पर उसका मन मानता है कि गुरु उसके हृदय और चरणों में ही बसे हैं। भजन में श्रद्धा, विश्वास और करुणा की भावना झलकती है। गुरु से मिली सीख और ज्ञान को याद करते हुए शिष्य अपने मन की व्यथा सरल शब्दों में व्यक्त करता है। 

 

पाछा भेजोनी भीखणजी म्हारे गुरुवर ने

🎶 लय – धमाल

 

पाछा भेजोनी भीखणजी म्हारे गुरुवर ने, 

पाछा भेजोनी… 

 

कोई बोले चांद में पूग्या, 

कोई स्वर्ग बतावेजी,

म्हारो मनड़ो बोले गुरु है, थांरे चरणा में। 

 

सिरीयारी रा गीत सूणाता, 

गुरु कठीने रमग्या जी,

दीखे कोनी शब्द सूणीजे म्हाने सुपना में। 

 

भेद बतायो, ज्ञान दीयो पण, 

अधबीच क्यूं छिटकायो जी,

पूछांला के खामी रह गई म्हारी सिरधा में। 

 

शासण रो आंगन बिन, 

तुलसी सूनो सूनो लागे रे,

नैन झरे और शब्द उलझगया सगला करुणा में। 

 

यह भजन हमें गुरु के महत्व का स्मरण कराता है। गुरु का स्थान जीवन में सबसे ऊँचा है। उनकी याद, उनकी वाणी और उनका आशीर्वाद सदा हमारे साथ रहता है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏