ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां (Om Bhikshu Bhikshu Nit Dhyava)

यह भजन “ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां” जैन धर्म के महान आचार्य आचार्य भिक्षु के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करता है। इस भजन की रचना साध्वी रतनश्री जी ने की है। इसमें आचार्य भिक्षु के नाम का निरंतर स्मरण करने, उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने और उनके त्यागमय व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया है।

 

ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां

🎶 लय – संयममय जीवन हो

✍🏻 रचयिता – साध्वी रतनश्री जी 

 

ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां। 

भिक्षु की म्हे अलख जगाकर, 

आनन्दित बण ज्यावां।।

 

प्रातः भिक्षु सांयः भिक्षु, 

चलतां फिरतां भिक्षु, 

उठतां भिक्षु, सोतां भिक्षु, 

तन में मन में भिक्षु। 

भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु, 

भिक्षु रो ध्यान लगावां।।

 

विघ्न हरण मंगलकारी है,

भिक्षु नाम सदा रो, 

जंगल में मंगल हो ज्यावै, 

भिक्षु नाम सहारो। 

भिक्षु-भिक्षु जपतां टूटी, 

बेड्यां विस्मय पार्वा।।

 

भिक्षु बाबो संघ हितेषी, 

योगक्षेम नित चावै, 

सकंट की घड़ियां में सन्मुख, 

आकर सदा बचावै। 

त्यागमूर्ति रो चित्र सामनै, 

देख-देख हर्षावां।।

 

नाम भिक्षु रो है मंत्राक्षर, 

रिद्धि-सिद्धि रो दाता, 

जीवन नैया रो संचालक, 

भिक्षु भाग्य विधाता। 

श्री धी धृति संपन्न बण, 

मन में संकल्प सजावां।।

 

भिक्षु नाम दवा गुणकारी, 

सारा रोग मिटावां, 

महाप्रज्ञ रो पथ-दर्शन पा, 

आगे कदम बढ़ावां। 

भिक्षु शासन री गरीमां नै, 

च्यारूं ओर फैलावां।।

 

यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के नाम का स्मरण करने और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। उनके मार्ग पर चलकर हम संयम, सेवा और धर्ममय जीवन की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏