ॐ भिक्षु! आरती उतारें ॐ जय भिक्षु! (Om Bhikshu! Aarti Utare Om Jai Bhikshu!)

यह आरती “ॐ भिक्षु! आरती उतारें ॐ जय भिक्षु!” साध्वी राजीमती जी द्वारा रचित एक भक्तिपूर्ण रचना है। इसमें आचार्य भिक्षु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता का भाव प्रकट किया गया है। आरती के माध्यम से उनके आदर्शों, मर्यादा और त्यागमय जीवन को याद किया जाता है। यह रचना तेरापंथ धर्मसंघ की परंपरा, अनुशासन और साधना की महिमा को भी दर्शाती है। 

 

ॐ भिक्षु! आरती उतारें ॐ जय भिक्षु!

🎶 लय – ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता  

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी 

 

ॐ भिक्षु! 

आरती उतारें ॐ जय भिक्षु! 

प्राण से पुकारे ॐ जय भिक्षु!

सुमिरण दीप जलाएं, 

चरणों शीष झुकाए।।

 

वंदना है सौ-सौ बार, 

भाव से प्रणाम है, 

भाव से प्रणाम है, 

मुख-मुख बोल रहा, 

एक तेरा नाम है, 

एक तेरा नाम है, 

होऽऽऽऽ चन्दा की चांदनी ज्यों, 

सब को सुहाए।।

 

एक झूठ बोलते ही, 

मन घबराया था, 

मन घबराया था, 

रात की अन्धेरी में, 

ज्वर ने डराया था, 

ज्वर ने डराया था, 

होऽऽऽऽ क्रान्ति के नारे तुमने, 

प्रातः लगाये।।

 

मर्यादा में रहना सहना, 

तेरापंथ सिखाता है, 

तेरापंथ सिखाता है, 

आचार्यों की दृष्टि में यह, 

चलना बताता है, 

चलना बताता है, 

होऽऽऽऽ किसकी है ताकत गण पर, 

आँख उठाये।।

 

सांवरे के बलिदानों की, 

संघ यह कहानी है, 

संघ यह कहानी है, 

लाखों-लाखों श्रावकों की, 

बोलती कुर्बानी है, 

बोलती कुर्बानी है, 

होऽऽऽऽ त्यागी तपस्वी गण में, 

नाम कमाये।।

 

नमो भिक्षु, भारीमाल, 

रायरिषि, जीत है, 

रायरिषि जीत है, 

मघवा, माणक, डालगणी, 

कालु से भी प्रीत है, 

कालु से भी प्रीत है, 

होऽऽऽऽ तुलसी का नाम, 

जल में पत्थर तराए, 

होऽऽऽऽ महाप्रज्ञ नाम, 

मन में चेतना जगाए।।

 

यह आरती आचार्य भिक्षु के आदर्शों, मर्यादा और त्याग की याद दिलाती है। इसे गाते समय श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत होता है। यह हमें धर्म, संयम और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏