म्हारै मन-मन्दिर में प्रभु महावीर है (Mhare Mann-Mandir Mein Prabhu Mahavir Hai)

यह महावीर भजन भक्त के मन में बसे भगवान महावीर स्वामी की निरंतर अनुभूति को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें उनके धैर्य, समता, तप, ध्यान और आत्मिक शांति का सुंदर चित्रण है। भजन बताता है कि चंडकौशिक जैसे भयानक उपसर्गों के समय भी भगवान महावीर पूरी तरह शांत, स्थिर और करुणामय बने रहे। उनका यह समभाव और अहिंसक दृष्टिकोण श्रोताओं के हृदय को गहराई से छू जाता है।

 

म्हारै मन-मन्दिर में प्रभु महावीर है

🎶 लय – खड़ी नीम के निचे 

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाप्रज्ञ 

 

म्हारै मन-मन्दिर में प्रभु महावीर है।
खातां-पीतां-सोतां-उठतां दीसै इक तस्वीर है।। 

 

चंडकौशियो डंक लगायो,

पिण प्रभु विचलित हुया नहीं,

नाना कष्ट भयंकर आया,

फिर भी स्थिरता बणी रही।

परम वीर विभु नहीं बण्या दिलगीर है॥

 

लम्बी-लम्बी तपस्या सागै,

ध्यान निरन्तर धरता हां,

नश्वर तन रो मोह छोड़कर,

आत्मरमण नित करता हां।

सूरज निकल्यो आख़िर बादल चीर है॥

 

सोचूं प्रात: आज दिवस में,

महावीर बणकर रहणो,

सुख-दुःख री सारी स्थितियाँ में,

समता-धारा में बहणो।

इन चिन्तन स्यूं मनड़ो बणै सुधीर है॥

 

बो ही दिनड़ो धन्य हुवेला,

महावीर बण ज्यावांला,

तोड़ श्रृंखला आठ करम री,

अजर अमर पद पावांला।

योगनिरोधी पावै भवजल तीर है॥

 

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन के हर सुख-दुःख में समता, धैर्य और आत्मचिंतन बनाए रखें। प्रभु महावीर के आदर्शों पर चलकर ही मन की शांति, शुद्धता और सच्ची मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏