यह प्रेरक भक्ति गीत आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित है, जो भगवान महावीर के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है। इस रचना के माध्यम से कवि हमें महावीर के सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे महान आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दे रहे हैं। इसमें संयम, दृढ़ इच्छाशक्ति और निस्वार्थ सेवा भाव पर बल दिया गया है ताकि हम विकारों से मुक्त होकर आत्म-कल्याण के मार्ग पर बढ़ सकें। यह गीत हमें कायरता त्यागकर मैत्री और सद्भावना के पथ पर चलने का संदेश देता है।
महावीर प्रभु के चरणों में
🎶 लय – दया दान का डंका
✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री तुलसी
महावीर प्रभु के चरणों में,
श्रद्धा के कुसुम चढ़ाएं हम।
ऊँचे आदर्शों को अपना,
जीवन की ज्योति जगाएं हम।।
तप संयम मय शुभ साधन से,
आराध्य-चरण आराधन से।
बन मुक्त विकारों से सहसा,
अब गीत विजय के गाएं हम।।
दृढ़ निष्ठा नियम निभाने में,
हो प्राण बलि प्रण पाने में।
मजबूत मनोबल हो ऐसा,
कायरता कभी न लाएं हम।।
यश-लोलुपता, पद-लोलुपता,
न सताए कभी विकार-व्यथा।
निष्काम स्व-पर कल्याण काम,
निज पल पल सफल बनाएं हम।।
गुरुदेव-शरण में लीन रहें,
निर्भीक धर्म की बाट बहें।
अविचल दिल सत्य, अहिंसा का,
दुनिया को सुपथ दिखाएं हम।।
प्राणी-प्राणी सह मैत्री हो,
ईर्ष्या, मत्सर, अभिमान न हो।
कहनी-करनी इकसार बना,
‘तुलसी’ तेरा पथ पाएं हम।।
यह गीत हमें सिखाता है कि महावीर के सिद्धांतों को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारना ही सच्ची भक्ति है। निस्वार्थ सेवा और शुद्ध मन से जीने का संकल्प ही हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
