महावीर का नाम मंगल-मंगल है (Mahavir Ka Naam Mangal-Mangal Hai)

यह भजन भगवान महावीर के मंगलमय नाम, जीवन और उपदेशों का भावपूर्ण गुणगान है। सरल शब्दों में रचित यह रचना हमें संयम, करुणा और आत्मशुद्धि के मार्ग की याद दिलाती है। महावीर का नाम स्वयं में शुभता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस भजन के माध्यम से श्रद्धालु प्रभु के नाम-स्मरण, दर्शन और ध्यान के महत्व को अनुभव करता है तथा जीवन को मंगलमय बनाने की प्रेरणा पाता है। 

 

महावीर का नाम मंगल-मंगल है

🎶 लय – खड़ी नीम के नीचे

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाश्रमण 

 

महावीर का नाम मंगल-मंगल है।

ले लो प्रभु का नाम मंगल-मंगल है।।

 

त्रिशला के लाल दुलारे, 

सिद्धारथ कुल उजियारे।

भक्तों के भाग्य-सितारे, 

बिहार भूमि के प्यारे।

स्थान वह मंगल है।। 

 

संयम के पथ पर आए, 

कष्टों से नहीं घबराए।

दिल में इकतारी लाए, 

वे परम ज्योति को पाए।

दिवस वह मंगल है।।

 

सुन सच्ची शिक्षा पाते, 

लाखों को पार लगाते।

पापी जन भी तर जाते, 

जो चरणों में आ जाते।

उसी के मंगल है।।

 

तेरे दर्शन में मंगल है, 

तेरी वाणी में मंगल है।

तेरी नजरों में मंगल है, 

तेरे चरणों में मंगल है।

नाम में मंगल है।।

 

तेरा प्रतिपल जाप करेगा, 

वह संकट दूर करेगा।

तेरा प्रतिपल ध्यान धरेगा, 

वह आत्मानन्द वरेगा।

‘सुमन’ के मंगल है।।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान महावीर का नाम, दर्शन और स्मरण जीवन को शुभ दिशा देते हैं। संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया नाम-जप आत्मशांति, सद्भाव और मंगलमय जीवन का आधार बनता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏