करॆमि भंते! सामाइयं – सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र – अर्थ सहित (Karemi Bhante! Samaiyam – Samayik Pratigya Sutra – With Meaning)

सामायिक जैन धर्म की एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक क्रिया है, जिसमें साधक समभाव में स्थित होकर हिंसा, असत्य, चोरी, कुशील और परिग्रह से विरत होने का संकल्प करता है। सामायिक प्रारंभ करते समय गुरु या अरिहंत की साक्षी में “करॆमि भंते! सामाइयं” सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र का पाठ किया जाता है। इस प्रतिज्ञा द्वारा साधक निश्चित समय (एक मुहूर्त) तक मन, वचन और काया से सावद्य योगों का त्याग कर आत्मशुद्धि का अभ्यास करता है।

 

करॆमि भंते! सामाइयं - सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र

करॆमि भंते! सामाइयं

सावज्जं जोगं पच्चक्खामि

जाव नियमं

मुहुत्तं एगं

पज्जुवासामि

दुविहं तिविहेणं

न करॆमि न कारवेमि

मणसा वयसा कायसा

तस्स भंते!

पडिक्कमामि

निंदामि गरिहामि

अप्पाणं वोसिरामि

 

करॆमि भंते! सामाइयं - सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)

करॆमि भंते! सामाइयं
हे भंते! मैं सामायिक करता हूँ।
O Revered One, I undertake the practice of Samayik.

 

सावज्जं जोगं पच्चक्खामि
मैं समस्त पापयुक्त योगों का त्याग करता हूँ।
I renounce all sinful and harmful activities.

 

जाव नियमं
जब तक नियम है, तब तक।
For the duration of the vow.

 

मुहुत्तं एगं
एक मुहूर्त (लगभग 48 मिनट) तक।
For one muhurt (about 48 minutes).

 

पज्जुवासामि
मैं उस नियम का पालन करता हूँ।
I observe and abide by this vow.

 

दुविहं तिविहेणं
दो प्रकार से और तीन प्रकार से।
In two ways and in three ways.

 

न करॆमि न कारवेमि
न स्वयं करता हूँ, न दूसरों से करवाता हूँ।
I neither do it myself nor cause others to do it.

 

मणसा वयसा कायसा
मन, वचन और काया से।
By mind, speech, and body.

 

तस्स भंते!
उस विषय में, हे भंते!
Regarding that, O Revered One.

 

पडिक्कमामि
मैं प्रायश्चित करता हूँ।
I repent for those faults.

 

निंदामि गरिहामि
मैं उनकी निंदा करता हूँ और आत्मग्लानि करता हूँ।
I condemn them and reproach myself.

 

अप्पाणं वोसिरामि
मैं अपने आत्मा को उनसे अलग करता हूँ।
I disengage my soul from those actions.

 

यह सामायिक प्रतिज्ञा सूत्र साधक को आत्मसंयम, समभाव और आत्मशुद्धि की ओर प्रेरित करता है। नियमित भावपूर्वक सामायिक करने से मन, वचन और काया की पवित्रता बढ़ती है तथा आत्मा कर्मबंधन से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर होती है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏