कहै किसनोजी चाल-चाल भारीमाल (Kahe Kisnoji Chaal-Chaal Bharimal)

यह भजन “कहै किसनोजी चाल-चाल भारीमाल” एक भावपूर्ण कथा है। इसमें पिता और पुत्र के बीच के स्नेह, त्याग और वैराग्य का वर्णन है। पुत्र संसार छोड़कर धर्म मार्ग अपनाना चाहता है, जबकि पिता का हृदय मोह से भरा है। संवाद के माध्यम से उनके मन की स्थिति प्रकट होती है। अंत में धर्म की विजय और करुणा का भाव सामने आता है। यह भजन त्याग, श्रद्धा और भक्ति की सुंदर सीख देता है। 

 

कहै किसनोजी चाल-चाल भारीमाल

🎶 लय – चांदी की दीवार न तोड़ी

 

कहै किसनोजी चाल-चाल भारीमाल! 

भीखणजी थांरै कांई लागै,

काढे आंख्या लाल-लाल भारीमाल! 

भीखणजी थांरै कांई लागै,

खांचै बावलियो झाल, चाल भारीमाल! 

भीखणजी थांरै कांई लागै।।

 

अट्ठारै-सै-चोकै मंगल, 

आखातीज जलम थारो।

पांच बरस रो छोड़ मरी थारी, 

मां दूजो कुण साहारो।

कित्तो दोरो पाल र मोटो करयो, 

जीव जाणै म्हारो,

तूं भावी री ढ़ाल, नाव री हाल।

 

मनै न राखै स्वामीजी तो, 

मैं भी तनै कियां छोडूं,

बुढ़ापै रो स्हारो लकड़ी, 

तोड़ भला क्यूं दु:ख ओढूं।

एक घाव दो टूक बात है, 

लौढेड़ै ने के ओढ़ूं,

झूठो जिद मत झाल लाल! खुशहाल।

 

सोहरो घणो राखस्युं नान्हां, 

तनै अहल नहिं आवण द्यूं,

तावड़ियै में दूर गोचरी-पाणी, 

तनै न जावण द्यूं।

इसो-बिस्यो अणगम्यो उतरतो, 

तनै कदै नहीं खावण द्यूं,

म्हारै साहमो न्हाल, छोड़ पंपाल।

 

बोले भारीमाल अजी, 

मोटा पुरूषां! मनै समझाओ,

छोड़ दिया संसार, 

बाप-बेटा रो अबै किसो दाओ।

थांरै हाथ रो अन्न-जल ल्यूं तो, 

त्याग मनै मत ले ज्यावो,

सुणतां उठ्यो उबाल भीम भूचाल।

 

घींस’र लेयग्या ऊंचो-नीचो, 

ले’र मनावै समझावै,

बेटो मूण न खोलै, 

पाणी पिवै नहिं रोटी खावै।

दो दिन बीत्या बण्या निपीत्या, 

जीव बाप रौ अकुलावै,

दो दिन बीत्या बण्या निपीत्या, 

जीव बाप रौ अकुलावै,

 

अन्त हार, मन-मार ल्यार, 

पाछा सूंप्या ल्यो स्वामीजी,

ओ तो राजी आं चरणां स्युं, 

आहार ल्यार द्यो स्वामीजी।

म्हारो भी तो ठोड़-ठिकाणो, 

कठेइ जमाद्यो स्वामीजी,

दीनदयाल! कृपाल! भाल, सुविशाल।

 

जयमलजी म्हारासा नै ल्या, 

किसनोजी न संमलावै,

‘सागर’ तीनूं घर बधावणा, 

बुद्धि भीखण री बै गावै।

जम्यो ठिकाणो चेलो मिलग्यो, 

टल्यो ओगालौ हरसावै,

करयो कमाल, बवाल टाल रिछपाल।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा मार्ग धर्म और त्याग का है। मोह छोड़कर भक्ति अपनाने से जीवन सफल होता है। अंत में करुणा और समझ से ही सबका कल्याण होता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏