प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन (Pratah Uth Parmeshthi Vandan)
Panch Parmeshthi Bhajanयह सुंदर भजन “प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन” प्रातःकाल में गाए जाने वाला एक पावन स्तवन है। इसमें परमेष्ठी भगवान, चौबीस तीर्थंकर, गणधर, आर्यिकाएँ, साधु …
यह सुंदर भजन “प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन” प्रातःकाल में गाए जाने वाला एक पावन स्तवन है। इसमें परमेष्ठी भगवान, चौबीस तीर्थंकर, गणधर, आर्यिकाएँ, साधु …
यह भजन देव, गुरु और धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करता है। इसमें चौबीस तीर्थंकरों का स्मरण करते हुए उनके चरणों में विनम्र वंदन किया …
यह भक्ति-गीत भगवान सीमंधर स्वामी के प्रति गहरी श्रद्धा और विनय प्रकट करता है। इसमें भक्त प्रभु के चरणों में शीश नवाकर उनके दर्शन की प्रार्थना करता …
यह भक्ति-गीत गौतम गणधर जी की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। वे भगवान महावीर स्वामी के प्रमुख शिष्य थे और अद्भुत ज्ञान, तप और साधना के प्रतीक …
परमेष्ठी वंदना एक भावपूर्ण स्तुति है, जिसमें जैन धर्म के पाँच परमेष्ठियों—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—के गुणों का श्रद्धा से स्मरण किया गया है। रचना …
यह रचना आस्था, संकल्प और आत्मशुद्धि की प्रेरणादायक अभिव्यक्ति है। इसमें जीवन को प्रभु के पावन मार्ग पर अर्पित करने, सत्य और सिद्धांतों पर …
यह रचना आचार्य श्री तुलसी जी की एक भावपूर्ण स्तुति है, जिसमें साधु-जीवन की महिमा, संयम, तप और परोपकार का सुंदर चित्रण है। इसमें गुरु-अनुशासन …
यह रचना उपाध्याय परमेष्ठी के प्रति श्रद्धा, विनय और कृतज्ञता के भाव से अभिसिंचित है। आचार्य श्री तुलसीजी ने इसमें उपाध्यायजी के ज्ञान-प्रकाश, आगम-सेवा और …
यह भजन आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित एक करुण भाव से भरा आध्यात्मिक पद है। इसमें जीवात्मा की असहाय अवस्था और संसार-रूपी भवसागर से पार होने की …
“देवो देवो जी डगर वर” एक भावपूर्ण जैन स्तवन है, जिसकी रचना आचार्य श्री तुलसी ने की है। इस स्तवन में भक्त सिद्ध-नगर की ओर जाने वाले मार्ग का रहस्य …
यह सुप्रसिद्ध जैन संत आचार्य तुलसी द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण और विनम्र प्रार्थना है। इस भक्ति रचना में भक्त अपने आराध्य (प्रभु) को अपने मन रूपी …
यह सुप्रसिद्ध जैन भजन आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित है, जो ‘जैन शासन’ के पंच परमेष्ठी (अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधू) को समर्पित है। ‘मैं ढूँढ फिरी …
यह सुप्रसिद्ध जैन भजन आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित है। इसमें बहुत ही सुंदर और सरल भाषा में जैन धर्म के पावन प्रतीकों की वंदना की गई है। इस रचना में 24 …
यह भक्ति रचना आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित एक पावन वंदना है, जो जैन धर्म के सर्वोपरि ‘णमोकार महामंत्र’ पर आधारित है। इसमें पंच परमेष्ठी (अरहंत, सिद्ध …