इक्षु रस के जैसा भिक्षु नाम तेरा (Ikshu Ras Ke Jaisa Bhikshu Naam Tera)

यह भजन आचार्य भिक्षु के पावन व्यक्तित्व और उनके महान त्याग को समर्पित है। इसमें उनके नाम की मधुरता को इक्षु रस से तुलना की गई है। भजन में उनके प्रकाशमय जीवन, केलवा और सिरियारी से जुड़ी पावन स्मृतियों तथा तेरापंथ की महिमा का सरल वर्णन है। यह रचना श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता से भरी हुई है, जो मन में विनम्रता और प्रेरणा जगाती है। 

 

इक्षु रस के जैसा भिक्षु नाम तेरा

🎶 लय – देवकुमार जैसा 

 

इक्षु रस के जैसा भिक्षु नाम तेरा,

केलवा के योगी ले प्रणाम मेरा।

तू प्रखर दिवाकर, मैं सघन अंधेरा,

केलवा के योगी ले प्रणाम मेरा।।

 

बल्लूशा के लाड़ले दीप दीपां मात के,

केलवा के केवली, धणी अपनी बात के।

स्वर्ग छोड़ मेरे, मन में कर बसेरा।।

 

जगमग जग हो रहा तेरे योगदान से,

सिरीयारी तीर्थ बनी, भिक्षु निर्वाण से।

रंग है ये साचा, तूने जो बिखेरा।।

 

तेरा पंथ स्वामी सब सुखों का मूल है,

तेरा पंथ में कहीं शूल है न धूल है।

भ्रांति है न भ्रम है अंत है न फेरा।।

 

तेरी ज्योत का ये क्रम नाथ अब भी चल रहा,

आज तेरे पंथ पर, दिव्य दीप जल रहा।

दीप जले दीप से, दूर हो अंधेरा।।

 

यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के आदर्श मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके पंथ की ज्योत आज भी हमारे जीवन को दिशा देती है। श्रद्धा से गाया गया यह गीत अज्ञान का अंधेरा दूर करता है सदा सर्वदा। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏