यह भक्ति-गीत आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित है। इसमें माता दीपांजी के सुपुत्र, महान संत और जिन-शासन की शान का भावपूर्ण गुणगान किया गया है। गीत में उनके साहस, ज्ञान, चिंतन और सुधार कार्यों का सरल व मार्मिक वर्णन है। यह रचना तेरापंथ की गौरवशाली परंपरा और मानवता के आदर्शों को दर्शाती है। श्रद्धा, कृतज्ञता और भक्ति से भरा यह गीत भक्तों के हृदय में प्रेरणा और उत्साह जगाता है।
घणां सुहावो माता दीपांजी
🎶 लय – खम्मा खम्मा हो म्हारा रुणीछे
✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री तुलसी
घणां सुहावो माता दीपांजी रा जाया!
थांनै तो ध्यावै सारो राजस्थान हो,
सारो हिन्दुस्तान हो,
मानवता रा मान हो,
जिन-शासन री शान हो,
माता दीपांजी रा जाया।।
शास्त्रां री गहराई में,
अति गहराई स्यूं थे उतरया,
कांटां रै बीहड़ मारग में,
निर्भयता स्यूं चरण धरया।
हो स्वामी!
कीन्हो धीरज धर अपणो अनुसंधान हो।।
एक रात री तीव्र ताव,
चिन्तन की धारा मोड़ दी,
रूढ़िवाद री सबल श्रृंखला,
इक झटके स्यूं तोड़ दी।
हो स्वामी!
विरला जन कर पाया थांरी पहचान हो।।
अंतिम आश्रय मानव रो,
थांरो पहलो आवास हो,
मृत्यु में ही जीवन रो,
मानो गहरो आभास हो।
हो स्वामी!
पायो अमरत्व को नूतन विज्ञान हो।।
चीर कुहासो पलट्यो पासो,
थांरी कल्याणी वाणी,
पढ़तो-पढ़तो थकै न कोई,
थांरै जीवन री क्हाणी।
हो स्वामी!
दीपै दुनियां में तेरापंथ महान हो।
एक सूत्र में बांध्यो बाबो,
साधां रै समुदाय नै,
शिष-शाखा रो ममत मिटायो,
एक-एक नै ताय नै।
हो स्वामी!
बत्तीसै रो बो सारो संविधान हो।।
धर्माधर्म विवेचन थांरो,
कानां री खिड़क्यां खोलै,
बो साहित्य मारवाड़ी में,
सारां रै मूंढ़ै बोलै।
हो स्वामी!
खुल्लै दिल संघर्षां में झोंकी ज्यान हो।।
म्हे कासीद प्रभू रै घर रा,
हळुकर्म्यां रै मनभावां,
करां उघाड़ पोप-लीला रो,
पाखंड्यां नै अणखावां।
हो स्वामी!
थांरा आदर्श वीर वर्धमान हो।।
घणी मधुर घटनावां थांरी,
किसी-किसी नै याद करां,
पावन नाम प्रभू रो नाच रह्यो है,
जन-जन रै अधरां।
हो स्वामी!
थांरै पद-चिह्नां पर थांरी संतान हो।।
‘विश्व भारती’ रे प्रांगण में,
चरमोत्सव की रंगरळी,
चौतीसै भाद्रव तेरस दिन ‘तुलसी’,
खिलगी कळी-कळी।
हो स्वामी!
भक्तां रै भावां में थे मूर्तिमान हो।।
हो स्वामी!
प्राणां री पुलकन हो,
मन री मुसकान हो।।
यह गीत हमें प्रेरणा देता है कि हम आचार्य के आदर्शों पर चलें। उनके त्याग, साहस और ज्ञान को जीवन में अपनाएँ। मानवता, एकता और सच्चे धर्म का मार्ग ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
