यह भक्ति-गीत गौतम गणधर जी की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। वे भगवान महावीर स्वामी के प्रमुख शिष्य थे और अद्भुत ज्ञान, तप और साधना के प्रतीक माने जाते हैं। उनके नाम का जप आत्मिक शांति, ज्ञान और पुण्य प्रदान करने वाला बताया गया है। इस भजन में उनकी महानता, त्याग और दिव्य शक्तियों का सरल और भावपूर्ण रूप में गुणगान किया गया है।
गौतम गणधर बड़े महान रिद्धि -सिद्धि का देते दान
🎶 लय – रघुपति राघव राजाराम
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी
गौतम गणधर बड़े महान, रिद्धि -सिद्धि का देते दान।
जिनके जप से नवों निधान, मिलता सच्चा आत्मिक ज्ञान।।
महावीर के शिष्य बड़े, करते घण्टों ध्यान खड़े।
बिना सहारे शिखर चढ़े, बन गये ज्ञानी बिना पढ़े।।
गौतम जप से मिटते रोग, टलते भूत-प्रेत के योग।
मन-वांछित सब मिलते भोग, कटते दुष्ट कर्म-संयोग।।
पृथ्वी मां वसुभूति विलास, वर्ष पचास रहे गृहवास।
तीस वर्ष तक प्रभु के पास, द्वादश केवल-ज्ञान प्रकाश।।
थी अक्षीणलब्धि विख्यात, गौतम के कर में साक्षात।
नहीं खूटते घृत मधुभात, जो जपता गौतम को प्रात।।
यह भजन हमें गौतम गणधर जी की भक्ति, ज्ञान और तप की महिमा बताता है। उनके नाम का जप करने से आत्मिक शांति और पुण्य मिलता है। यह भजन श्रद्धा बढ़ाता है और हमें धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
