गौरव गाथा भिक्षु के बलिदान की – सत्य शोध की नई कहानी (Gaurav Gatha Bhikshu Ke Balidan Ki – Satya Shodh Ki Nai Kahani)

यह गीत आचार्य भिक्षु के त्याग, साहस और सत्य की खोज की प्रेरक गाथा को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। इसमें उनके अडिग संकल्प, धर्म के प्रति निष्ठा और सिद्धांतों पर अटल रहने की भावना का वर्णन है। कठिन परिस्थितियों, विरोध और भय के बीच भी उन्होंने सत्य मार्ग नहीं छोड़ा। यह रचना हमें बताती है कि सच्चा साधक वही है जो आत्मबल और विश्वास से नया इतिहास रचता है। 

 

गौरव गाथा भिक्षु के बलिदान की - सत्य शोध की नई कहानी

🎶 लय – आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं

 

सत्य शोध की नई कहानी, 

बगड़ी के प्रस्थान की।

गौरव गाथा गूंज रही है, 

भिक्षु के बलिदान की।

वन्दे गुरुवरम्‌, सत्यम दुष्करम्‌।।

 

सत्यसुधा का पान कराने, 

तुमने चरण बढ़ाया था,

जिनवाणी की आन-बान पर, 

अपना शीश नमाया था।।

घोर अमां की रातों में भी, 

दीपक बन मुस्काया था।

कष्टों को भी सहते सहते, 

दृढ़ संकल्प सझाया था।

नहीं कभी परवाह की तुमने, 

आंधी और तूफान की।।

 

आगम मंथन करके तुमने, 

सत्य तत्त्व को जाना था,

धर्मक्रान्ति का बिगुल बजाकर, 

धर्मतत्व पहचाना था।

शिथिलाचार मिटा करके ही, 

आत्मा को सरसाना था।

समझौता नहीं सिद्धांतों से, 

लक्ष्य स्वयं को पाना था।

अलख जगाई तुमने घर-घर, 

अंतर के आह्वान की।।

 

स्थानक से प्रस्थान किया, 

तब धरती अम्बर डोला था,

संत वैरागी भीखणजी है, 

बच्चा बच्चा बोला था।

रात्री में शमशान वास कर, 

निर्भयता को तोला था।

कहां छिपी है मन में भिती, 

भीतर को टंटोला था।

धुनी रमाकर फक्कड़पन की, 

ली राहें अनजान की।।

 

रघुराजा ने छतरी आकर, 

भिखण को समझाया था,

पंचम आरे की दुर्बलता, 

अपना भाव जताया था।

लोग लगास्यूं थांरै लारै, 

डर भी खूब दिखाया था।

नहीं रूकेंगे पैर कभी भी, 

मन मजबूत बनाया था।

अलबेले उस महापुरूष ने, 

साधी बाजी प्राण की।।

 

बगड़ी सुधरी पुण्य बनी है, 

नया उजाला आया है,

नये सृजन की नव बेला में, 

नव इतिहास रचाया है।

गुरु तुलसी के उन स्वप्‍नों को, 

चिर साकार बनाया है।

महाप्रज्ञ के अन्तर्मन में, 

कितना आनंद छाया है।

 

यह गीत हमें सत्य, साहस और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। आचार्य भिक्षु का जीवन सिखाता है कि सिद्धांतों पर अटल रहकर ही सच्ची विजय मिलती है और समाज में उजाला फैलता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏