“देव-दाणव-गंधव्वा” – ब्रह्मचर्य विकास मंत्र – अर्थ सहित (“Dev-Danav-Gandhava” – Brahmacharya Vikas Mantra – With Meaning)

यह ब्रह्मचर्य विकास मंत्र जैन धर्म में संयम और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत कठिन साधना है, लेकिन इसका फल बहुत महान होता है। जो व्यक्ति मन, वचन और शरीर से संयम रखता है, वह सच्चे अर्थ में श्रेष्ठ बनता है। 

 

ब्रह्मचर्य विकास मंत्र

देव-दाणव-गंधव्वा, जक्ख-रक्खसकिन्नरा। 

बंभयारिं नमंसंति, दुक्करं जे करंति तं।।

 

Dev-daanav-gandhavva, jakkh-rakkhas-kinnara.

Bambhayaarim namansanti, dukkaram je karanti tam.

 

ब्रह्मचर्य विकास मंत्र का अर्थ (Meaning in Hindi & English)

देव-दाणव-गंधव्वा 

देवता, दानव और गंधर्व

Gods, demons, and Gandharvas

 

जक्ख-रक्खसकिन्नरा

यक्ष, राक्षस और किन्नर

Yakshas, Rakshasas, and Kinnaras

 

बंभयारिं नमंसंति

ब्रह्मचारी को नमस्कार करते हैं

They bow to the one who practices Brahmacharya

 

दुक्करं जे करंति तं 

जो इस कठिन साधना को करते हैं

Those who perform this difficult practice

 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏