देखो मर्यादा की महिमा, कैसी गण की सुषमा छाई (Dekho Maryada Ki Mahima, Kaisi Gan Ki Sushma Chhayi)

यह प्रेरणादायक भजन मर्यादा, अनुशासन और आस्था की महिमा को सरल शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें जैन तेरापंथ धर्मसंघ की पावन परंपरा, आचार्य भिक्षु की वाणी और आचार्यों के आदर्शों का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन बताता है कि मर्यादा ही संघ की शक्ति और एकता का आधार है। गुरु-परंपरा, विनय, निष्ठा और सही आचरण से जीवन उज्ज्वल बनता है।

 

देखो मर्यादा की महिमा, कैसी गण की सुषमा छाई

🎶 लय – दुनियां राम नाम नहीं जाणै

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी

 

देखो मर्यादा की महिमा, 

कैसी गण की सुषमा छाई। 

देखो अनुशासन की गरिमा, 

कैसी आस्था की अरुणाई।।

 

मर्यादा है स्त्रोत शक्ति का, 

आर्य भिक्षु की वाणी। 

माला के हर मनके में है,

भीखण की सहनाणी।।

 

जिन आज्ञा का मुकुट बनाकर, 

अपने शीष चढ़ाया। 

निज पर शासन फिर अनुशासन, 

का ध्वज तब लहराया।।

 

विनय मूल है सुमति-सुगति का, 

देखा सत्य नवेला। 

गुरु-गुरु, चेला-चेला साक्षी, 

भारिमाल का तेला।।

 

निष्ठा की स्याही से देखो, 

लिखित पत्र यह सारा। 

अक्षर-अक्षर में अंकित है, 

एक-एक ध्रुव तारा।।

 

जयाचार्य की सूझ-बूझ का, 

धर्मसंघ आभारी। 

मर्यादा का महा महोत्सव, 

नई कल्पना सारी।।

 

नव-नव चिंतन और योजना, 

गण का तेज बढ़ा है। 

तुलसी का कर्तृत्व बोलता, 

युग ने पाठ पढ़ा है।।

 

प्रतिपल है गुरु पास हमारे, 

हो चिन्तन की धारा। 

इस प्रायोगिक आयोजन का, 

कैसा स्पष्ट इशारा।।

 

चारुवास आचार्यवास है, 

द्रोणाचार्य निवासी। 

ताल और पर्वत देवानी, 

प्रज्ञा के अभ्यासी।। 

 

गण का यह वटवृक्ष निरंतर, 

व्यापक बनता जाए। 

‘महाप्रज्ञ’ तुलसी की आभा, 

आत्मा में रम जाए।।

यह भजन हमें याद दिलाता है कि मर्यादा, अनुशासन और गुरु-आज्ञा का पालन जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। आचार्यों के आदर्शों को अपनाकर हम अपने जीवन में शांति, सदाचार और आत्मिक प्रगति का मार्ग प्राप्त कर सकते हैं। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏