दीपानंद भीखण जी पधारो (Deepanand Bhikhan Ji Padharo)

यह भजन आचार्य श्री भिक्षु स्वामी (भीखण जी) की वंदना और उनके पावन आगमन की भावना को व्यक्त करता है। इसमें भक्तों की श्रद्धा, उत्साह और दर्शन की अभिलाषा को सरल एवं भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। जागरण की तैयारी, भक्ति-भाव, विनती और जय-जयकार के माध्यम से यह रचना गुरु महिमा का स्मरण कराती है।

 

दीपानंद भीखण जी पधारो

🎶 लय – फूल तुम्हें भेजा है ख़त में

✍🏻 रचयिता – श्रीमती रतनी देवी छाजेड़ एवं सुपुत्र श्री सतीश कुमार छाजेड़ 

 

दीपानंद भीखण जी पधारो, 

जागरण की तैयारी है।

आओ आओ बेगा आओ, 

चाव दरस को भारी है।।

   

थे आओ जद काम बणैला, 

थां पर म्हारी बाज़ी है।

कंटालिया कांटा वाला सुणल्यो, 

चिन्ता म्हाने लागी है।

देर करो मत ना तरसाओ, 

चरणां अरज ये म्हारी है।। 

 

रिद्धि सिद्धि संग आओ भिक्षु,

देओ दरस थारां भगतां नै।  

आ’र बरावां, धोक लगावां, 

श्रद्धा चढ़ावां चरणां मैं।

भीखण जी थारां हाथां मैं, 

अब तो लाज हमारी है।। 

 

भगतां की तो विनती सुणली,

बल्लू सुत प्यारो आयो है।

जय जयकार करो भिक्षु की, 

म्हारो मन हर्षायो है।

बरसैलो रस अब भजनां में, 

स्वामी महिमा न्यारी है।। 

 

दोहा :

विनती थां स्यूं भिक्खू, 

करां सकल नर-नार। 

बेगा आओ आंगणै, 

सज्यो सकल दरबार।।  

 

यह भजन गुरु भक्ति, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की अनुभूति कराता है। इसके भाव मन को शांति देते हैं और गुरु महिमा का स्मरण कराते हैं। भजन के माध्यम से भक्तों का विश्वास और समर्पण और भी दृढ़ होता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏