चइत्ता भारहं वासं – शान्तिस्तुति मंत्र – अर्थ सहित (Chaitta Bharaham Vaasam – Shanti Stuti Mantra – With Meaning)

चइत्ता भारहं वासं – शान्तिस्तुति मंत्र जैन आगमिक परंपरा से जुड़ा हुआ एक भावपूर्ण स्तुतिवचन है। इसमें त्याग, वैराग्य और तपस्या का आदर्श भाव व्यक्त होता है। यह मंत्र मन को शांति देने वाला है और जैन धर्म के उच्च नैतिक मूल्यों की स्मृति कराता है। 

 

चइत्ता भारहं वासं – शान्तिस्तुति मंत्र – अर्थ सहित

चइत्ता भारहं वासं, 

चक्कवट्टी नराहिओ।

 

चइत्ता उत्तमे भोए, 

महापउमे तवं चरे॥

 

चइत्ता भारहं वासं - शान्तिस्तुति मंत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)

चइत्ता भारहं वासं

भारतवर्ष का विशाल वैभव और ऐश्वर्य छोड़कर।
Having renounced the vast prosperity and grandeur of Bharatvarsha.

 

चक्कवट्टी नराहिओ।

चक्रवर्ती राजा (अर्थात् अत्यंत शक्तिशाली सम्राट)।
The Chakravarti king, the supreme and powerful ruler.

 

चइत्ता उत्तमे भोए

श्रेष्ठ और उत्तम भोगों को त्यागकर।
Renouncing the finest and highest worldly pleasures.

 

महापउमे तवं चरे॥

महान आत्मा के समान तपस्या का आचरण किया।
He practiced penance like a great and exalted soul.

 

यह शान्तिस्तुति हमें त्याग, वैराग्य और आत्मसंयम का संदेश देती है। सांसारिक ऐश्वर्य छोड़कर तप और साधना के मार्ग पर चलने से ही सच्ची शांति, समता और आत्मकल्याण की प्राप्ति होती है। यही जैन दर्शन का मूल मानव उद्देश्य है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏