यह भजन आचार्य भिक्षु स्वामी की महिमा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा को प्रकट करता है। इसमें भक्त अपने हृदय की भावना व्यक्त करते हुए उन्हें अन्तर्यामी और जीवन के तारनहार के रूप में स्मरण करता है। भजन में तेरापंथ की साधना, संयम, शुद्ध उपासना और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण का सुंदर वर्णन है। सरल शब्दों में यह रचना भक्त और गुरु के गहरे प्रेम तथा विश्वास को दर्शाती है।
भिक्षु स्वामी! अन्तर्यामी! करद्यो बेड़ा पार
🎶 लय – मिलो न तुम तो
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी
भिक्षु स्वामी! अन्तर्यामी! करद्यो बेड़ा पार।
आपरो आसरो है, केन्द्र विश्वास रो है।।
काळजै री कोर म्हांरै,
मन में रम्यो है थांरो नाम ओ,
सब कुछ अर्पण थांरै,
थे ही म्हारा राम घनश्याम हो।
पलक बिछावां, दर्शण चावां,
खोलो अन्तर द्वार।।
गंगा में न्हाल्यो चाहे,
काशी बणाल्यो अपणे धाम में,
चौसठ तीरथ मिलग्या,
म्हांनै तो सांवरिये रै नाम में।
रिद्धि-सिद्धि, होवै वृद्धि,
कल्पवृक्ष साकार।।
ऊंचो है दर्शन थांरो,
ऊंची है तेरापंथ री साधना,
पूजा में फूल चन्दन,
दीप नहीं है शुद्ध उपासना।
शत-शत वन्दन, दीपानन्दन,
अभिनन्दन उपहार।।
संयम री चांदनी में,
चमचम चमकै थांरो संघ है,
मेंहदी ज्यूं रमग्यो म्हांरी,
श्रद्धा में एक थांरो रंग है।
नयो नजारो, दिव्य सितारो,
तुलसी तारणहार।।
यह भजन हमें गुरु के प्रति समर्पण, संयम और सच्ची भक्ति का संदेश देता है। आचार्य भिक्षु स्वामी का स्मरण जीवन में शांति, विश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
