यह भजन “भिक्षु है इमरत रो झरणो” साध्वी फूलकुमारी जी द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण स्तुति है। इसमें आचार्य भिक्षु के गुणों का सरल और सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन बताता है कि उनके स्मरण से जीवन के दुख दूर होते हैं और मन को सच्चा सहारा मिलता है। इसमें भक्ति, विश्वास और आत्मिक शांति का संदेश है।
भिक्षु है इमरत रो झरणो
🎶 लय – धर्म की लौ जलाएँ
✍🏻 रचयिता – साध्वी फूलकुमारी जी (लाडनूं)
भिक्षु है इमरत रो झरणो।
जनम मरण री पीर निवारण,
है साचो शरणो।।
सुमिरण करयां कटै संकट,
दुःख गल्या लारली जावै,
काळी काळी राता में भी,
स्वतः उजासो आवै।
पितवाणी पूरी करली अब,
और न कुछ करणो।।
पल-पल पग-पग पर रखवाळो,
प्राण पियारो म्हारो,
एक शब्द में कहूं अगर,
गिरतां रो सबल सहारो।
बणग्यो जिण रै प्राण देव,
बीं-रो निश्चित तिरणो।।
मीरां रै घनश्याम राम है,
ज्यूं प्रभु भिक्षु म्हारै,
रोम-रोम नस-नस में बसिया,
अब म्है किण रै सारै।
चाहै आवै तूफानी अंधड़,
भी नहीं डरणो।।
यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के प्रति श्रद्धा और विश्वास बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उनके स्मरण से जीवन में साहस और शांति मिलती है। यह भक्ति भाव को मजबूत करता है और सही मार्ग दिखाता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
