यह प्रेरक गीत हमें ईमानदारी, सच्चाई और अच्छे कर्मों का महत्व बताता है। इसमें समझाया गया है कि धन, छल और लालच हमेशा साथ नहीं रहते। जीवन में हर कर्म का हिसाब एक दिन अवश्य होता है। इसलिए हमें संतोष, दया, न्याय और सच्चे आचरण के साथ जीवन जीना चाहिए। यही संदेश इस गीत का मुख्य आधार है।
बन्दे तजदे फंदे, आखिर परभव में जाना
🎶 लय – बच्चे मन के सच्चे
बन्दे तजदे फंदे, आखिर परभव में जाना।
पाई पाई का सब लेखा, होगा वहां चुकाना।।
छल बल कर रिश्वत लेकर,
झूठा भी सच्चा बनकर।
यहां छूट सकता है तूं,
विभव लूट सकता है तूं।
पर न चलेगी पोल वहां,
बता छुपेगा कहाँ कहाँ।
दूध दूध पानी का पानी,
विधि का न्याय पुराना।।
रघुपति राघव राजा राम,
पूरा वेतन आधा काम।
चाल दुरंगी यह तेरी,
करता जो हेरा फेरी।
कुदरत जब खबरें लेगी,
जड़ा मूल से खो देगी।
समझाले दिल अभी नहीं तो,
होगा फिर पछताना।।
रोटी कपड़ा मिला मकान,
रख न अधिक तृष्णा नादान।
आखिर एक दिन है मरना,
क्यों फिर हाय हाय करना।
प्राप्त उसी में कर संतोष,
सुन ले अणुव्रत का उदघोष।
देख स्वयं से सिर्फ स्वयं को,
अगर शान्ति सुख पाना।।
दीनों का शोषण कर-कर,
खून गरीबों का पीकर।
माया जोड़ी निर्दय बन,
पर न हजम होगा यह धन।
दगा किसी का सगा नहीं,
कर्मों के फल मिले सही।
मुनि संजय क्यों तुच्छ स्वार्थ हित,
बुनता ताना बाना।।
यह गीत हमें याद दिलाता है कि सच्चे कर्म ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। लालच छोड़कर सत्य, संतोष और मानवता का मार्ग अपनाने से ही सच्चा सुख, शांति और सम्मान मिलता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
