आपणै तो देव गुरु धर्म रो आधार (Apanay To Dev Guru Dharm Ro Aadhar)

यह भजन देव, गुरु और धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करता है। इसमें चौबीस तीर्थंकरों का स्मरण करते हुए उनके चरणों में विनम्र वंदन किया गया है। साथ ही गुरु परंपरा के महान आचार्यों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट किया गया है। यह भजन हमें सच्चे मार्ग पर चलने, निर्मल ध्यान करने और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।

 

आपणै तो देव गुरु धर्म रो आधार

🎶 लय – मेरो छोटो सो मदन गोपाल 

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी 

 

आपणै तो देव गुरु धर्म रो आधार।

करसी तीर्थंकर भव स्यूं पार, 

वन्दन वन्दन है।।

 

रिषभ, अजित, सम्भव स्वामी।

प्यारा अभिनन्दन जगत्राण, 

वन्दन वन्दन है।।

 

सुमति, पदम, सुपार्स, चन्दा।

सुविधि शीतल, श्रेयांस जग भाण, 

वन्दन वन्दन है।।

 

वासुपुज्य, श्री-विमल, अनन्त।

धर्म, शान्ति, कुथु भगवान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

अर, मल्लि, श्री मुनिसुरत।

नमि, नेमिनाथ गुणवान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

ॐ पार्श्‍वनाथ, महावीर प्रभु।

करस्यां प्रतिदिन निर्मल ध्यान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

सांवरिया स्वामीजी म्हांनै पार करसी।

गुरुवर तुलसी रो संघ महान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

महाप्रज्ञजी रो संघ महान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

महाश्रमणजी रो संघ महान, 

वन्दन वन्दन है।।

 

यह भजन हमें देव, गुरु और धर्म में अटूट श्रद्धा रखने की प्रेरणा देता है। तीर्थंकरों और गुरुजनों का स्मरण करने से मन शुद्ध होता है। इससे आत्मा को शांति, सही मार्ग और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏