अहो प्रभु! तुम ही दायक शिव-पंथ ना (Aho Prabhu! Tum Hi Dayak Shiv-Panth Na)

यह भक्ति-भाव से भरा सुंदर स्तवन “अहो प्रभु! तुम ही दायक शिव-पंथ ना” भगवान जिनेश्वर की महिमा का वर्णन करता है। इसमें भक्त प्रभु को सच्चा शरणदाता, दुःखों का नाश करने वाला और मोक्ष मार्ग दिखाने वाला मानता है। प्रत्येक पंक्ति में प्रभु के उपदेश, करुणा और मार्गदर्शन का गुणगान है। यह रचना हमें राग-द्वेष छोड़कर सही मार्ग अपनाने और आत्मकल्याण की प्रेरणा देती है। 

 

अहो प्रभु! तुम ही दायक शिव-पंथ ना

🎶 लय – अहो प्रभु तुम बट पाड़ी

 

अहो प्रभु! 

तुम ही दायक शिव-पंथ ना।।

 

अहो प्रभु! 

अजित जिनेश्वर आपरो, ध्याऊं  ध्यान हमेश हो। 

अहो प्रभु ! 

अशरण शरण तूं ही सही, मेटण सकल कलेश हो।।

 

अहो प्रभु! 

उपशम रस मरि आपरी, वाणी सरस विशाल हो। 

अहो प्रभु! 

मुगति-निसरणी मनोहरूं, सुण्यां मिटै भ्रम जाल हो।।

 

अहो प्रभु! 

उभय बंधण आप आखिया, राग-द्वेष विकराल हो। 

अहो प्रभु! 

हेतु ए नरक निगोद ना, राच्या मुरख बाल हो।।

 

अहो प्रभु! 

रमणी राखसणी कही, विषबेली मोहजाल हो। 

अहो प्रभु! 

काम भोग किम्पाक-सा, दाख्या दीन दयाल हो।।

 

अहो प्रमु! 

विविध उपदेश देई करी, तैं तारया नर-नार हो। 

अहो प्रभु! 

भव-सिन्धु-पोत तूं ही सही, तूं ही जगत-आधार हो।।

 

अहो प्रभु! 

शरण आयो तुझ साहिबा! बस रह्या हीया मांय हो। 

अहो प्रभु! 

आगम-वयण अंगीकारी, रह्यो ध्यान तुझ ध्याय हो।।

 

अहो प्रभु! 

संवत उगणीसै भाद्रवै, दसमी आदितवार हो। 

अहो प्रभु! 

आप तणा गुण गाविया, वर्त्या जै जै कार हो।।

 

अंत में, यह स्तवन हमें सिखाता है कि सच्ची शरण केवल प्रभु में है। उनके उपदेशों को अपनाकर हम भ्रम और दुःख से मुक्त होकर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

🙏जय जिनेंद्र🙏