आचार्य कालूगणी आरती – ॐ जय कालू गुरुदेव, धन्य जमारो बांरो (Acharya Kalugani Aarti – Om Jai Kalu Gurudev, Dhanya Jamaro Baaro)

यह आरती आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य कालूगणी के तप, त्याग, संयम और धर्मप्रभावना का सुंदर वर्णन किया गया है। आरती में उनके जन्म, दीक्षा, कठिन साधना, विभिन्न प्रदेशों में विहार तथा तेरापंथ धर्मसंघ की प्रतिष्ठा बढ़ाने के कार्यों का भावपूर्ण चित्रण मिलता है। यह रचना गुरु भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक प्रेरणा से भरपूर है तथा साधकों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है। 

 

आचार्य कालूगणी आरती - ॐ जय कालू गुरुदेव, धन्य जमारो बांरो

🎶 लय – आरती

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी

 

ॐ जय कालू गुरुदेव, धन्य जमारो बांरो, 

जो निशदिन सारी सेव, 

ॐ जय कालू गुरुदेव।।

 

छापुर में अवतरियो, गुणदरियो स्वामी। 

बीदासर मघवा-कर, संयम-श्री पामी।।

 

चंदेरी छ्यांसट्टे, पट्टोत्सव पीनो। 

सत्ताईस बरस लग, तपियो दृढ़सीनो।।

 

मरु मालव मेवाड़ां, थलवट हरियाणै। 

ढूंढाड़ां पंजाबा, विचरण मंडाणै।।

 

त्रिशला-सुत-शासन री, आभा अति भारी। 

तेरापंथ-प्रख्याती, कीन्ही जग जारी।।

 

भोग भयंकर, शंकर, त्याग तणी सरणी। 

अभयंकर दरसाई, शिवपुर संचरणी।।

 

लाखां नर री नैया, भवजल स्यूं तारी। 

जैन-जगत जगदीश्वर! है तव आभारी।।

 

दृढ़तम हार्दिक भावे, कायिक कष्ट सह्यो। 

गंगापुर चरमोच्छव, छक्कां छाय रह्यो।।

 

यह आरती गुरु भक्ति, त्याग और संयम का संदेश देती है। आचार्य कालूगणी का जीवन धर्म, साधना और मानव कल्याण की प्रेरणा देकर श्रद्धा जागृत करता है।

🙏जय जिनेंद्र🙏