आरती – जय महावीर भगवान (Aarti – Jai Mahavir Bhagwan)

यह पावन आरती अंतिम जैन तीर्थंकर, भगवान महावीर की भक्ति में समर्पित है। इस स्तुति के माध्यम से भक्त प्रभु को अपने मन-रूपी मंदिर में पधारने का निमंत्रण देता है। इसमें महावीर स्वामी को राग-द्वेष का विजेता और संसार का रक्षक बताया गया है। सरल शब्दों में रचित यह आरती हमें आत्मा की शक्ति जगाने और जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त होने की प्रेरणा देती है। इसे सच्ची श्रद्धा के साथ गाने से मन को असीम शांति प्राप्त होती है।

 

आरती - जय महावीर भगवान

🎶 लय – आरती  

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री तुलसी

 

जय महावीर भगवान, 

हो प्रभु! महावीर भगवान।  

मन-मंदिर में आओ, धरूँ निरन्तर ध्यान।

जय महावीर भगवान।

 

पावन नाम तुम्हारा, मंत्राक्षर प्यारा, 

हो प्रभु! मंत्राक्षर प्यारा।  

मेरी स्वर-लहरी पर, उठे एक ही तान। 

जय महावीर भगवान।

 

राग-द्वेष विजेता, सिद्धि-सदन-नेता, 

हो प्रभु! सिद्धि-सदन-नेता।   

क्षमा मूर्ति जग त्राता, मिटे सकल व्यवधान। 

जय महावीर भगवान। 

 

अनेकान्त-उद्गाता, अनुपम सुखदाता, 

हो प्रभु! अनुपम सुखदाता।  

जनम-जनम के बंधन, तोड़े कर संघान। 

जय महावीर भगवान। 

 

आधि-व्याधि की माया, मिटे प्रेत छाया, 

हो प्रभु! मिटे प्रेत छाया।  

आत्म-शक्ति जग जाए, लघु भी बने महान। 

जय महावीर भगवान।

 

भक्ति भरा मन मेरा, तोड़ रहा घेरा, 

हो प्रभु! तोड़ रहा घेरा।  

तन्मय बनकर ‘तुलसी’, करूँ सदा संगान। 

जय महावीर भगवान। 

 

यह आरती हमें भगवान महावीर के बताए अहिंसा और अनेकांत के मार्ग पर चलने की सीख देती है। प्रभु की यह स्तुति न केवल मानसिक क्लेशों को दूर करती है, बल्कि हमारे भीतर साहस और करुणा का संचार भी करती है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏