आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां (Aao Swamiji, Thane Jhala De Bulawa)

यह भक्ति-गीत श्रद्धा, प्रेम और समर्पण से भरा हुआ है। इसमें भक्त अपने आराध्य स्वामीजी को विनम्र भाव से आमंत्रित करता है। वह कहता है कि वह उनके स्वागत के लिए अपनी पलकों की जाजम बिछाने को तैयार है। गीत में भक्ति, विश्वास और गुरु के प्रति अटूट निष्ठा का सुंदर भाव प्रकट होता है। यह रचना हृदय में श्रद्धा जगाती है और गुरु चरणों में पूर्ण समर्पण का संदेश देती है। 

 

आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां

🎶 लय – धरती धोरां री

✍🏻 रचयिता – साध्वी कनकश्री जी 

 

आओ स्वामीजी, 

आओ स्वामीजी, 

आओ स्वामीजी,

थांनै झाला दे बुलावां, 

जाजम पलकां री बिछावां,

कुंकुम पगल्यां स्यूं पधरावां।।

 

थांरी पल-पल रटन लगावां,

निशि दिन पल-पल छिन-छिन ध्यावां।

थांरी गौरव-गाथा गावां।।

 

मानस मंदिर में बिठास्यां,

दीया भक्ति रा जळास्यां।

म्हांरा तन-मन चरण चढ़ास्यां।।

 

थांरो नाम लियां बल जागै,

डर भय हड़को धड़को भागै।

जाणै हरदम थे हो सागै।।

 

तेरस रो दिन पावन आयो,

भिक्षु चरमोत्सव रंग छायो।

जन-मन आनंद घन लहरायो।।

 

थांरै कदमां पर बढ़ पावा,

वचनां पर ऐ प्राण चढ़ावां।

शासन रो सम्मान बढ़ावां।।

 

यह भजन गुरु भक्ति और समर्पण की मधुर अभिव्यक्ति है। इसे गाते समय मन में श्रद्धा, प्रेम और विश्वास का भाव जागृत होता है। यह हमें गुरु चरणों में निष्ठा बनाए रखने की प्रेरणा देता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏