आओ स्वामीजी आतमा री जोत जगाओ (Aao Swamiji Aatma Ri Jot Jagao)

यह एक सुंदर जैन भजन है, जिसकी रचना मुनि बुद्धमल्ल जी ने की है। इस भजन में श्रद्धालु स्वामीजी से प्रार्थना करते हैं कि वे आत्मा की ज्योति जगाएँ और सही मार्ग दिखाएँ। भजन में गुरु की महिमा, करुणा, धर्म के प्रति दृढ़ता और समता का भाव व्यक्त किया गया है। इसमें बताया गया है कि सच्चे गुरु अज्ञान को दूर कर जीवन को प्रकाशमय बनाते हैं।

 

आओ स्वामीजी आतमा री जोत जगाओ

🎶 लय – ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता 

✍🏻 रचयिता – मुनि बुद्धमल्ल जी 

 

आओ स्वामीजी, 

आतमा री जोत जगाओ, 

चरण-शरण में आयो, 

श्रद्धा-दीप जलायो, 

अन्तर्मन हुलसायो, 

आओ स्वामीजी ।।

 

घोर कलिकाल में थे, 

साचा अवतारी हा, 

सूरज री उगाळी ज्यूं, 

अडीकता संसारी हा। 

हो ऽऽऽऽ भटक्योड़ी चेतना नै, 

सुपथ दिखायो।।

 

तत्त्व की पिछाण थांरी, 

बहुत ही अनूठी ही, 

मोक्ष के ही सामनै, 

संसार स्यूं अपूठी ही। 

हो ऽऽऽ खोट न खटाई, 

सोनो विशुद्ध बणायो।।

 

मान-अपमान दोनूं, 

घोळ कर थे पीग्या हा, 

द्वेष की न छां लागी, 

करुणा स्यूं भीग्या हा। 

हो ऽऽऽ सिक्को धरम रो, 

जग में जबर जमायो।।

 

कष्टां नै साथी मान, 

हंस-हंस झेल्या हा, 

परिसां रै सागै सदा, 

निरभै हो खेल्या हा। 

होऽऽऽ महावीर वालो सागी, 

विरुद निभायो ।।

 

पाली में चौमास, 

और मोच्छव भेळो है, 

‘बुद्ध’ च्यारूं तीर्थ वालो, 

आछो आज मेळो है। 

होऽऽऽ मर्यादा रो भारी, 

रंग बरसायो ।।

 

यह भजन गुरु भक्ति और आत्म-जागरण का सुंदर संदेश देता है। स्वामीजी की वाणी और मार्गदर्शन से जीवन में सच्चे धर्म का प्रकाश फैलता है और साधक सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा पाता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏