आओ-आओ भिक्षु स्वामी! अब तो म्हारै आँगणियै (Aao-Aao Bhikshu Swami! Ab To Mhare Aanganai)

यह भजन श्रद्धा और भक्ति से भरा हुआ है, जिसमें भक्त अपने हृदय के आँगन में भिक्षु स्वामी का सादर आमंत्रण करता है। सरल राजस्थानी भावों में रचा गया यह गीत गुरु-भक्ति, आत्मिक शांति और शरणागति की भावना को प्रकट करता है। भजन में यह भाव झलकता है कि गुरु का दर्शन और नाम-स्मरण जीवन के हर कष्ट को दूर कर देता है तथा साधक को सही मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

 

आओ-आओ भिक्षु स्वामी! अब तो म्हारै आँगणियै

🎶 लय – तेजा

 

आओ-आओ भिक्षु स्वामी!

अब तो म्हारै आँगणियै,

उभा अडीकां कदका आपनै।

 

पक्ष उजळो तिथि है तेरस,

घट में म्हारै चान्दणियो,

श्रद्धा रा फूल बिछावां सामनै।।

 

शब्द-शब्द और साँस-साँस में,

भिक्षु री झणकार उठै,

खातां पीतां सोतां उठतां,

खोजां भिक्षु गया कठै।

दर्शन तो देणां पड़सी आपनै।।

 

इसी जग्यां नहीं म्हारै घट में,

जठै आपरो नाम नहीं,

आख्यां में उतरो तो स्वामिन,

पाऊं मैं आराम सही।

म्है तो नहीं भूलां थांरै जाप नै।।

 

कष्टां री काली रातां में,

एक आपरो ही शरणो,

एकर तो संभाल्या सरसी,

बैठ्या कद का दे धरणो।

भव-भव में शरणो थांरो म्हांनै।।

 

ई कलियुग में आप सरीखा,

संत पुरुष मिलणा मुश्किल,

अपणै श्रम स्यूँ ही पावै है,

वीर पुरुष अपणी मंजिल।

जग नै समझायो – रात्यूं जाग नै।।

 

थांरै गण-उपवन री शोभा,

लहर-लहर-लहरावै है,

गण-गुम्बज पर आज देखल्यो,

धर्म-ध्वजा फहरावै है।

‘तुलसी’ सा मालिक मिलग्या संघ नै।।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे गुरु की शरण में ही जीवन को सही दिशा और शांति मिलती है। भिक्षु स्वामी का स्मरण मन को निर्मल करता है और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏