सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं (Subah-Subah Uthkar Bhikshu-Bhikshu Bol Tu)

यह भजन भिक्षु नाम की महिमा को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु नाम का स्मरण करने की प्रेरणा दी गई है, जिससे जीवन के दुःख, संकट और विघ्न दूर होते हैं। भजन आस्था, श्रद्धा और साधना की भावना को जाग्रत करता है तथा मन को शुद्ध, स्थिर और सकारात्मक बनाने का संदेश देता है। यह भजन भक्त के जीवन में विश्वास, साहस और मंगल कामनाओं का संचार करता है।

 

सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं

🎶 लय – बादलियो आंखड्ल्यां 

 

सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं,
संकट सब कट जावैला, ओ सुजना।।

 

विघ्न हरण ओ मंगलकारी नाम है,
दुःख में आडो आवैला, ओ सुजना।।

 

सांवरिये रो सुन्दर नाम, प्राणाँ स्यूं भी प्यारो है,
बल्लूशा रो पुत्र, माता दीपाँ रो दुलारो है।
भक्ताँ रै मन भावैला, ओ सुजना।।

 

स्वामीजी रै नाम स्यूं, सरै इच्छित काम है,
सिरियारी बण्यो आज, पावन तीरथ धाम है।
दुःख-दुविधा मिट जावैला, ओ सुजना।।

 

ॐ भिक्षु जय भिक्षु, मंत्र चमत्कारी है,
प्रतिपल जाप जपो, भय भंजन हारी है।
पौरुष मन में जागैला, ओ सुजना।।

 

स्वामीजी रो नाम लाखाँ, लोगाँ रो आधार है,
अन्तर मन स्यूं ध्यान धरयाँ, होसी बेड़ो पार है।
कल्मष सब धुप जावैला, ओ सुजना।।

 

घोर कलिकाल में, भिक्षु शासन पायो है,
मानो चिन्तामणि रत्न, कर में म्हारे आयो है।
कल्पवृक्ष लहरावैला, ओ सुजना।।

 

संघ नायक घोषित, भिक्षु चेतना रो वर्ष है,
तेरापंथ संघ रो ओ, भावी उत्कर्ष है।
चार तीर्थ हरषावैला, ओ सुजना।।

 

‘मुनि सुमति’ री आस्था, थां पर अपरम्पार है,
खाता-पीता, सोता-उठता, भिक्षु री गुंजार है।
मन निर्मल बन जावैला, ओ सुजना।।

 

यह भजन हमें प्रतिदिन भिक्षु नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जाप मन को निर्मल करता है तथा जीवन में शांति, साहस और मंगल भाव उत्पन्न करता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏