तिक्खुत्तो आयाहिणं – गुरु वंदना पाठ (पंचांग वंदना) – अर्थ सहित (Tikkhutto Aayahinam – Guru Vandana Paath (Panchanga Vandana) – With Meaning)

तिक्खुत्तो आयाहिणं – गुरु वंदना पाठ, जैन परंपरा का एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण और महत्वपूर्ण पाठ है। इस पाठ में गुरु के प्रति तीन बार प्रदक्षिणा, वंदना, नमस्कार, सत्कार और उपासना की भावना व्यक्त की जाती है। पंचांग वंदना जैन धर्म की एक पवित्र क्रिया है, जिसमें पांच अंग (दो घुटने, दो हथेलियां और माथा) जमीन को छूते हैं। यह गुरु के प्रति परम विनम्रता को दर्शाता है।

इस शारीरिक वंदना के दौरान, तिक्खुत्तो आयाहिणं (गुरु वंदना पाठ) को प्राचीन प्राकृत भाषा में बोला जाता है। मन, वचन और काया की शुद्धि के लिए इस प्रक्रिया को ठीक तीन बार दोहराया जाता है। इस पाठ से श्रावक गुरु को कल्याण, देवत्व और पवित्रता का प्रतीक मानकर नमन करते हैं। प्रतिक्रमण के दौरान यह आवश्यक प्रार्थना है।

तिक्खुत्तो आयाहिणं - गुरु वंदना पाठ (पंचांग वंदना)

तिक्खुत्तो 

आयाहिणं  

पयाहिणं 

करेमि 

वंदामि 

नमंसामि  

सक्कारेमि 

सम्माणेमि 

कल्लाणं 

मंगलं 

देवयं 

चेइयं 

पज्जुवासामि 

मत्थएणं वंदामि 

 

Tikkhutto

Aayahinam

Payahinam

Karemi

Vandami

Namansami

Sakkaremi

Sammanemi

Kallanam

Mangalam

Devayam

Cheiyam

Pajjuvasami

Matthaen Vandami

 

तिक्खुत्तो आयाहिणं - गुरु वंदना पाठ का अर्थ (Hindi & English Meaning)

तिक्खुत्तो
मैं तीन बार।
Three times.

 

आयाहिणं
दाहिनी ओर से (बाहिनी की तरफ़)
From the right side (to the left)

 

पयाहिणं
प्रदक्षिणा।
Circumambulation.

 

करेमि
करता हूँ।
I do / I perform.

 

वंदामि
मैं वंदना करता हूँ।
I offer reverence.

 

नमंसामि
मैं नमस्कार करता हूँ।
I bow respectfully.

 

सक्कारेमि
मैं आदर करता हूँ।
I show respect.

 

सम्माणेमि
मैं सम्मान करता हूँ।
I give honour.

 

कल्लाणं
आप कल्याण स्वरूप हैं।
You are the embodiment of welfare.

 

मंगलं
आप मंगल स्वरूप हैं।
You are the embodiment of auspiciousness.

 

देवयं
आप देवतुल्य हैं।
You are divine.

 

चेइयं
आप पूजनीय हैं।
You are worthy of worship.

 

पज्जुवासामि
मैं आपकी उपासना करता हूँ।
I worship you.

 

मत्थएणं वंदामि
मैं मस्तक झुकाकर वंदना करता हूँ।
I bow with my head in reverence.

 

इस गुरु वंदना पाठ में साधु-साध्वियों को तीन बार श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है। इसका भाव है कि उनके त्याग, संयम और ज्ञान से हमें सही मार्गदर्शन मिले और हमारा जीवन शुद्ध व धर्ममय बने।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏