चत्तारि मंगल पाठ – जैन धर्म की एक प्रसिद्ध और श्रद्धापूर्ण प्रार्थना है। यह पाठ चार मंगल रूपों का स्मरण कराता है, जिनसे जीवन में सही दिशा और सकारात्मक सोच विकसित होती है। इसे पढ़ने से मन में शांति का अनुभव होता है और धर्म के प्रति आस्था मजबूत होती है। जैन परंपरा में यह पाठ विशेष रूप से सुबह या धार्मिक अवसरों पर श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है, ताकि दिन की शुरुआत शुभ भावनाओं और निर्मल विचारों के साथ हो सके।
चत्तारि मंगल पाठ – अर्थ सहित
चत्तारि मंगलं,
अरिहंता मंगलं,
सिद्धा मंगलं,
साहू मंगलं,
केवली पण्णत्तो धम्मो मंगलं।
चत्तारि लोगुत्तमा,
अरिहंता लोगुत्तमा,
सिद्धा लोगुत्तमा,
साहू लोगुत्तमा,
केवली पण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमो।
चत्तारि सरणं पवज्जामि,
अरिहंते सरणं पवज्जामि,
सिद्धे सरणं पवज्जामि,
साहू सरणं पवज्जामि,
केवली पण्णत्तं धम्मं सरणं पवज्जामि।
चत्तारि गच्छामि,
अरिहंते गच्छामि,
सिद्धे गच्छामि,
साहू गच्छामि,
केवली पण्णत्तं धम्मं गच्छामि।
चत्तारि मंगल पाठ का अर्थ (Hindi & English Meaning)
चत्तारि मंगलं
चार चीजें मंगलकारी हैं
There are four auspicious entities
अरिहंता मंगलं
अरिहंत भगवान मंगलकारी हैं
Arihant Bhagwan is auspicious
सिद्धा मंगलं
सिद्ध भगवान मंगलकारी हैं
Siddha Bhagwan is auspicious
साहू मंगलं
साधु-संत मंगलकारी हैं
Sadhus (monks) are auspicious
केवली पण्णत्तो धम्मो मंगलं।
केवलज्ञानी द्वारा प्रतिपादित धर्म मंगलकारी है
The dharma preached by the omniscient (Kevali) is auspicious
चत्तारि लोगुत्तमा
चार तत्व सर्वोच्च (उत्तम) हैं
There are four supreme entities
अरिहंता लोगुत्तमा
अरिहंत भगवान सर्वोच्च हैं
Arihant Bhagwan is supreme
सिद्धा लोगुत्तमा
सिद्ध भगवान सर्वोच्च हैं
Siddha Bhagwan is supreme
साहू लोगुत्तमा
साधु-संत सर्वोच्च हैं
Sadhus are supreme
केवली पण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमो।
केवलज्ञानी द्वारा प्रतिपादित धर्म सर्वोच्च है
The dharma taught by the omniscient is supreme
चत्तारि सरणं पवज्जामि
मैं चार का शरण स्वीकार करता हूँ
I take refuge in the four
अरिहंते सरणं पवज्जामि
मैं अरिहंत भगवान की शरण स्वीकार करता हूँ
I take refuge in Arihant Bhagwan
सिद्धे सरणं पवज्जामि
मैं सिद्ध भगवान की शरण स्वीकार करता हूँ
I take refuge in Siddha Bhagwan
साहू सरणं पवज्जामि
मैं साधु-संतों की शरण स्वीकार करता हूँ
I take refuge in the Sadhus
केवली पण्णत्तं धम्मं सरणं पवज्जामि।
मैं केवलज्ञानी द्वारा प्रतिपादित धर्म की शरण स्वीकार करता हूँ
I take refuge in the dharma preached by the omniscient
चत्तारि गच्छामि
मैं चार के मार्ग पर चलता हूँ
I follow the path of the four
अरिहंते गच्छामि
मैं अरिहंत भगवान के मार्ग पर चलता हूँ
I follow the path of Arihant Bhagwan
सिद्धे गच्छामि
मैं सिद्ध भगवान के मार्ग पर चलता हूँ
I follow the path of Siddha Bhagwan
साहू गच्छामि
मैं साधु-संतों के मार्ग पर चलता हूँ
I follow the path of the Sadhus
केवली पण्णत्तं धम्मं गच्छामि।
मैं केवलज्ञानी द्वारा बताए गए धर्म के मार्ग पर चलता हूँ
I follow the path of the dharma taught by the omniscient
चत्तारि मंगल पाठ जैन धर्म का एक पवित्र पाठ है, जिसे श्रद्धा और शुद्ध भाव से पढ़ना चाहिए। इस पाठ के नियमित पाठ से मन में शांति, सकारात्मकता और धर्म के प्रति दृढ़ आस्था उत्पन्न होती है। इसे समझकर और भाव के साथ पढ़ना अधिक फलदायी माना गया है।
जय जिनेंद्र
