जपो नवकार मंत्र ज्ञाता स्वर्ग अपवर्ग सौख्य दाता (Japo Navkar Mantra Gyata Swarg Apvarg Saukhya Data)

यह स्तुति नवकार मंत्र की महिमा और पाँच परमेष्ठियों के गुणों का भाव बताती है। इसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु के ज्ञान, दर्शन, तप, चारित्र, संयम और करुणा का वर्णन है। नवकार मंत्र का श्रद्धा से स्मरण मन को शुद्ध करता है, भय और पाप को दूर करने की प्रेरणा देता है तथा आत्मा को धर्म और कल्याण के मार्ग पर बढ़ाता है। 

 

जपो नवकार मंत्र ज्ञाता स्वर्ग अपवर्ग सौख्य दाता

🎶लय – नेमजी की जान 

 

जपो नवकार मंत्र ज्ञाता, 

स्वर्ग अपवर्ग सौख्य दाता, 

भीति रुज तन में नहीं आता, 

रिपू कोइ कर न सकै घाता, 

कोड़ केवली गुण करै, 

तो पिण नावै पार, 

महा प्रभावक मंत्र परमेष्ठी, 

जपतां जय जयकार, 

मिटावै जनम मरण खाता।।

 

प्रथम अरिहंत देव नामें, 

दोष नहीं अष्टादश ज्यांमें, 

अखिल गुण द्वादश ही पामें, 

गिरा गुण पणतीसै तामें, 

जघन दोय कोड़ केवली, 

उत्कृष्टा नव मान, 

कर्मघातिया वेद खपावी, 

पाम्या केवल ज्ञान, 

बिड़ोजा चउसठ गुण गाता।।

 

नमो पद दूजै श्री सिद्धा, 

ज्ञान दर्शन कर समृद्धा, 

करम बसु हणि बसु गुण लीघा, 

अन्त भव अरणव का कीधा, 

द्रव्य प्राण नहीं एक ही, 

भाव प्राण है च्यार, 

ज्योतिनूप निकलंक निरञ्जन, 

अविनाशी अविकार, 

ध्यान उर योगेन्दर ध्याता।।

 

नमो पद आचारज तीजै, 

सम्पदा अष्ट देख रीझै, 

छतीसों गुण गिरवा लीजै, 

ओपमा सुरतरु की दीजै, 

हरि समान चउसंघ में, 

गीतारथ गुण धाम, 

पण्डित जोग अखण्डित पालै, 

धर्म जहाज निर्जाम,

सुजश वर लोक मांही ख्याता।।

 

नमो पद चौथे उवज्झाया, 

विमल गुण पणवीसे पाया, 

भारती चक्र वास ठाया, 

मिथ्यादर्शन सल्य अघ ढाया, 

भणै भणावे सूत्र सब, 

चरण करण का धार, 

डिगता प्राणी धर्म सूंस, 

कोई थिर कर राखणहार, 

भविक नैं बोध बीज दाता।।

 

नमो पद पंचम उपगारी, 

साधु गुण सप्तबीस धारी, 

अमल चित्त स्वच्छ गंग-वारी, 

तपोधन घोर ब्रह्मचारी, 

नमो ज्ञान दर्शन भणी, 

तप चारित्र उदार, 

अठ सिध नव निध मंगल माला, 

पग पग मिलै अपार, 

विघन-घन मेटण नै वाता।।

 

भणे जो भविजीव सुधभावै, 

थोक मन वंच्छित सब थावै, 

अचिन्ती कमला घर आवै, 

लावणी किशनलाल गावै, 

सार चतुर्दश पूर्व को, 

परम मंत्र नवकार, 

सद मंगल में धुर यह मंगल, 

सकल पाप क्षयकार, 

सुमिरतां वरतै सुखसाता।।

 

यह रचना सिखाती है कि नवकार मंत्र श्रद्धा, शांति और आत्मशुद्धि का साधन है। पाँच परमेष्ठियों के गुणों का स्मरण जीवन में संयम, सद्भाव और धर्म की प्रेरणा देकर आत्मकल्याण की ओर ले जाता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏