यह भजन तपस्या की शक्ति और महत्व को शब्दों में समझाता है। इसमें बताया गया है कि तपस्या तन और मन को शुद्ध करती है, कर्मों का बोझ घटाती है और आत्मा की सोई शक्तियों को जगाती है। आगम, वेद, कुरान और पुराण भी तप की महिमा बताते हैं। यह भजन हमें दृढ़ता, साहस और आत्मसंयम से जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।
करो तपस्या जग जाये जीवन ज्योति
🎶लय – प्रभो तुम्हारे पावन पथ पर
करो तपस्या, करो तपस्या,
जग जाये जीवन ज्योति,
तन सुध करती, मन सुध करती,
फिर अन्तर आत्मा को धोती।।
पंखी पांख-झाड़ता जैसे,
कर्म तपस्या से झड़ते,
भव-भव के पातक झड़ते ज्यों,
पतझड़ में पत्ते पड़ते,
कर्ज चुकता, हल्का होता,
आत्मा जिस बोझे को ढोती।।
आगम, वेद कुरान, पुराणों में,
तप महिमा गाई हैं,
सभी लब्धियां, सभी सिद्धियां,
तप से ही बतलाई है,
सोई हुई अनन्त शक्तियाँ,
तपस्या से ही जागृत होती।।
जब तक आयंबिल-तप चलता,
रहा द्वारिका नहीं जली,
दिया शराप दिपायन ऋषि ने,
किन्तु एक भी नहीं चली,
अटल प्रभाव तपस्या का यह,
कहे फिरोती भले मनोती।।
तप से अर्जुन माली जैसे,
पापी का उद्धार हुआ,
दृढ़-प्रहरी जैसे हत्यारे,
का बेड़ा… पार हुआ,
बंधे हुए चिकने कर्मों की,
करे कटोती कहे भगोती।।
तन से नहीं तपस्या मन की,
मजबूती से होती है,
कायरता से नहीं विजय तो,
रजपूती से होती है,
तूं सौदागर मन है ‘सागर,
तन है सीप तपस्या मोती।।
यह भजन सिखाता है कि तपस्या मन की मजबूती से होती है। धैर्य, साहस और आत्मसंयम से कर्मों का बोझ घटता है और जीवन में शुद्धता, शक्ति तथा उजाला आता है। इससे शांति मिलती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
